बैंक ऑफ बड़ौदा के मुनाफे में 72% की भारी गिरावट: जानिए क्या है वह अंतरराष्ट्रीय विवाद जिससे बढ़ गया सरकारी बैंक पर दबाव

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुनाफे में 72% की भारी गिरावट: जानिए क्या है वह अंतरराष्ट्रीय विवाद जिससे बढ़ गया सरकारी बैंक पर दबाव

भारत के बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में शुमार बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda - BoB) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस तिमाही में उसका स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट (शुद्ध लाभ) सालाना आधार पर 71.86% (लगभग 72%) गिरकर ₹1,278 करोड़ रह गया है, जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही में ₹4,541.4 करोड़ था। चौंकाने वाली बात यह है कि बैंक का मूल बैंकिंग कारोबार (कोर बिजनेस) मजबूत बना हुआ है, लेकिन एक बड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनी विवाद (Controversy) के कारण मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा साफ हो गया है।

क्या है वो बड़ी कंट्रोवर्सी? जिसने बैंक को दिया तगड़ा झटका

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुनाफे में आई इस ऐतिहासिक गिरावट की मुख्य वजह यूएई (UAE) आधारित हेल्थकेयर कंपनी एनएमसी हेल्थ (NMC Health PLC) से जुड़ा एक पुराना और बेहद चर्चित विवाद है।

दरअसल, यूएई की सबसे बड़ी निजी हेल्थकेयर कंपनियों में से एक 'एनएमसी हेल्थ' कुछ साल पहले बड़े वित्तीय घोटाले और धोखाधड़ी के बाद दिवालिया हो गई थी। इस मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा की अबू धाबी शाखा भी कानूनी पचड़े में फंस गई थी। बैंक पर आरोप थे कि उन्होंने उचित जांच-पड़ताल (Due Diligence), एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) और नो योर कस्टमर (KYC) नियमों का पूरी तरह पालन किए बिना लेनदेन की अनुमति दी थी। कई सालों से यह मामला यूएई सिविल लॉ और यूके इंसॉल्वेंसी लॉ के तहत अदालतों में चल रहा था।

आउट-ऑफ-कोर्ट सेटलमेंट: एक झटके में चुकाने पड़े ₹5,680 करोड़

इस कानूनी अनिश्चितता, समय की बर्बादी और अदालती खर्चों से बचने के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजमेंट ने एक बड़ा और व्यावहारिक व्यावसायिक फैसला लिया।

  • एकमुश्त भुगतान: बैंक ने एनएमसी हेल्थ के ज्वाइंट एडमिनिस्ट्रेटर्स के साथ कोर्ट के बाहर समझौता (Out-of-court settlement) कर लिया।

  • $600 मिलियन की पेनल्टी: इस समझौते के तहत बैंक ऑफ बड़ौदा को एकमुश्त 600 मिलियन डॉलर (लगभग ₹5,680.23 करोड़) की भारी-भरकम राशि का भुगतान करना पड़ा है।

  • प्रॉफिट पर असर: जून 2026 की तिमाही के खातों में इस ₹5,680 करोड़ की रकम को 'वन-टाइम एक्सेप्शनल लॉस' (असाधारण नुकसान) के रूप में दिखाया गया। यही कारण है कि बैंक का मुनाफा 72% घट गया। यदि इस एकमुश्त नुकसान को हटा दिया जाए, तो बैंक का वास्तविक नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹5,528 करोड़ होता।

बैंक का बुनियादी कारोबार मजबूत, NPA में सुधार

भले ही इस विवाद ने बैंक के तिमाही मुनाफे पर दबाव बढ़ा दिया हो, लेकिन परिचालन के मोर्चे पर बैंक की स्थिति मजबूत बनी हुई है:

  • नेट इंटरेस्ट इनकम (NII): बैंक की ब्याज से होने वाली कमाई (NII) 9.5% बढ़कर ₹12,524 करोड़ हो गई है।

  • ग्लोबल बिजनेस: बैंक का कुल ग्लोबल बिजनेस सालाना आधार पर 15.4% बढ़कर ₹30.5 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है।

  • एसेट क्वालिटी (NPA): बैंक का ग्रॉस एनपीए (GNPA) सुधरकर 1.99% पर आ गया है, जो इसकी लोन रिकवरी में मजबूती को दर्शाता है।

  • फंड जुटाने की तैयारी: इस दबाव के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा के बोर्ड ने विदेशी कामकाज के लिए अलग-अलग लोन सुविधाओं के जरिए फंड जुटाने की सीमा को $5 बिलियन से बढ़ाकर $10 बिलियन करने की मंजूरी दे दी है।

Latest Posts