135 एनबीएफसी (NBFCs) के लाइसेंस किए रद्द, पश्चिम बंगाल की कंपनियों पर गिरा सबसे बड़ा गाज
देश के वित्तीय और बैंकिंग सेक्टर को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर अपना कड़ा हंटर चलाया है। नियमों की अनदेखी और वित्तीय गड़बड़ियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए केंद्रीय बैंक ने एक साथ 135 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (CoR) तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए हैं। आरबीआई की इस अचानक और कड़क कार्रवाई से पूरे देश के कॉर्पोरेट और वित्तीय जगत में हड़कंप मच गया है। केंद्रीय बैंक द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूची में देश की कई जानी-मानी फाइनेंस और निवेश कंपनियां शामिल हैं, जिनके अब बाजार से लेनदेन करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
इन दिग्गज फाइनेंस कंपनियों पर गिरी गाज, सबसे ज्यादा कंपनियां पश्चिम बंगाल की शामिल
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान के मुताबिक, जिन 135 एनबीएफसी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रद्द किए गए हैं, उनमें एक्सप्रेस फिनकैप हाउस, अक्षय फिस्कल सर्विसेज, टाइम्स फाइनेंस (पी), जुपिटर प्रोजेक्ट्स (पी), जुपिटर फिनवेस्ट, एसेल फाइनेंस बिजनेस लोन्स और सिटीवाइड फाइनेंशियल सर्विसेज जैसी बड़ी कंपनियों के नाम प्रमुखता से शामिल हैं। आरबीआई ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि लाइसेंस गंवाने वाली इन 135 एनबीएफसी में से सबसे ज्यादा कंपनियों के रजिस्टर्ड कार्यालयों का पता पश्चिम बंगाल में दर्ज था। केंद्रीय बैंक की इस कार्रवाई को बंगाल के वित्तीय बाजार के लिए एक बहुत बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
13 अन्य एनबीएफसी कंपनियों ने खुद सरेंडर किए अपने लाइसेंस, विलय और बंदी बना मुख्य वजह
एक तरफ जहां रिजर्व बैंक ने 135 कंपनियों पर दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उनके रजिस्ट्रेशन छीने हैं, वहीं दूसरी तरफ 13 अन्य गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों ने खुद आगे बढ़कर केंद्रीय बैंक को अपने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट स्वेच्छा से सौंप दिए हैं। इनमें जे. थॉमस फाइनेंस, इकोन-सुपर सेल्स, हितेशा फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट, तिनेवेली तुतीकोरीन इन्वेस्टमेंट्स, कार्नेक्स विनिमय और इम्पैक्ट लीजिंग जैसी कंपनियां शामिल हैं, जिन्होंने गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान (NBFI) का अपना मुख्य व्यवसाय पूरी तरह बंद करने के कारण यह कदम उठाया। इसके अलावा कैस्पियन इम्पैक्ट इन्वेस्टमेंट्स, हरि दर्शन सेल्स, आइवरी कंसल्टेंट्स, एसकेए कंसल्टेंसी सर्विसेज, त्रिशिता मैनेजमेंट और सुबन ट्रेड्स ने अन्य कंपनियों में विलय (Merger), समापन या स्वैच्छिक रूप से कानूनी इकाई का अस्तित्व समाप्त होने की वजह से अपने लाइसेंस सरेंडर किए हैं। वहीं फोररनर कैपिटल इन्वेस्टमेंट्स ने बिना पंजीकरण वाली कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तय मानदंडों को पूरा करने के कारण अपना लाइसेंस सुपुर्द किया।
'काउंटरपार्टी लोन रिस्क' को लेकर रिजर्व बैंक का नया ड्राफ्ट सर्कुलर, 1 जुलाई तक मांगी प्रतिक्रिया
इस बड़ी दंडात्मक कार्रवाई के साथ ही रिजर्व बैंक ने वित्तीय बाजारों में जोखिम को कम करने के लिए 'काउंटरपार्टी' यानी प्रतिपक्ष ऋण जोखिम (CCR) से जुड़े संशोधित दिशानिर्देशों का एक नया ड्राफ्ट सर्कुलर जारी किया है। केंद्रीय बैंक ने इस पर सभी विनियमित संस्थाओं, बाजार प्रतिभागियों और आम जनता से 1 जुलाई 2026 तक उनकी आधिकारिक टिप्पणियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। नए प्रस्तावों के तहत बैंकिंग और ट्रेडिंग के लिए रखी गई संपत्तियों से जुड़े जोखिम में सीसीआर के दायरे को पूरी तरह स्पष्ट किया जाएगा। इसके साथ ही, कई मार्जिन समझौतों और मल्टी-ट्रांजैक्शन को जोड़-घटाकर शुद्ध जोखिम निकालने के नियमों पर नए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विस्तृत दिशा-निर्देश देने का प्रस्ताव है।
बैंकों के डेरिवेटिव लेनदेन और ऑप्शन प्रीमियम पर भी लगेगा सख्त रेगुलेशन, सेबी के साथ हुआ तालमेल
आरबीआई के इस नए सर्कुलर में बाजार नियामक सेबी (SEBI) से मान्यता-प्राप्त शेयर बाजारों के इक्विटी और कमोडिटी आधारित ट्रेडिंग सेगमेंट में समाशोधन सदस्य (Clearing Member) के रूप में बैंकों द्वारा किए जाने वाले हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करने की बात कही गई है। इसके अलावा मार्केट रिस्क को कंट्रोल करने के लिए ऑप्शन प्रीमियम के भुगतान को कुछ समय के लिए टालने का भी नया प्रस्ताव रखा गया है। आपको बता दें कि आरबीआई ने सबसे पहले वर्ष 2016 में डेरिवेटिव लेनदेन से जनरेटेड सीसीआर जोखिम की गणना और केंद्रीय प्रतिपक्षों के प्रति बैंकों की पूंजी जरूरतों पर दिशानिर्देश जारी किए थे, जिनका कार्यान्वयन कुछ तकनीकी कारणों से बाद में स्थगित कर दिया गया था, लेकिन अब इसे नए और सख्त रूप में लागू करने की तैयारी है।