ट्रंप का बड़ा एक्शन: भारत पर लगाया 10% का नया टैरिफ, जानें देश के निर्यातकों की कैसे बढ़ेगी टेंशन

ट्रंप का बड़ा एक्शन: भारत पर लगाया 10% का नया टैरिफ, जानें देश के निर्यातकों की कैसे बढ़ेगी टेंशन

वैश्विक व्यापार जगत (Global Trade) से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) प्रशासन ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए भारत समेत दुनिया की 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए आयात शुल्क (Tariff) लगाने का बड़ा एलान कर दिया है। इस नए फैसले के तहत अमेरिकी सरकार ने ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 (Section 301 of Trade Act) का इस्तेमाल करते हुए 10 फीसदी और 12.5 फीसदी के दो नए टैरिफ स्लैब लागू किए हैं। राहत की बात यह है कि हालिया नीतिगत सुधारों के चलते भारत को निचले स्लैब यानी 10 प्रतिशत वाले दायरे में रखा गया है। अमेरिका का यह नया आदेश आज (24 जुलाई 2026) से प्रभावी हो गया है, जो पूर्व में लगाए गए अस्थाई ग्लोबल टैरिफ की जगह लेगा।

अमेरिका ने क्यों उठाया यह सख्त कदम?

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर के मुताबिक, यह कदम उन देशों को लक्षित करके उठाया गया है जो अपनी सप्लाई चेन में 'बंधुआ या जबरन श्रम' (Forced Labour) पर रोक लगाने और नियमों को सख्ती से लागू करने में नाकाम रहे हैं। वॉशिंगटन का तर्क है कि श्रम कानूनों में ढील के कारण इन देशों को अमेरिकी निर्माताओं के मुकाबले अनुचित व्यापारिक लाभ (Unfair Trade Advantage) मिलता है। इस जांच के बाद अमेरिका ने उन देशों पर 10% ड्यूटी लगाई है जिनके पास कानून तो हैं लेकिन वे ठीक से लागू नहीं हैं, जबकि नियमों का अभाव रखने वाले देशों पर 12.5% का टैरिफ लगाया गया है। भारत के अलावा ब्रिटेन, कनाडा, मैक्सिको और बांग्लादेश जैसे देश भी इसी 10% वाले ब्रैकेट में शामिल हैं।

भारतीय निर्यातकों पर क्या होगा इसका असर?

अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन (Export Destination) और दूसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। साल 2025 में दोनों देशों के बीच करीब 141 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था, जिसमें भारत का निर्यात अकेले 87.3 अरब डॉलर रहा था। ऐसे में 10% का नया टैरिफ लागू होने से भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में मुकाबला करना थोड़ा महंगा और चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। इंजीनियरिंग सामान, टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे प्रमुख सेक्टर्स पर इसका सीधा दबाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि इससे वहां भारतीय सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

इन सेक्टर्स को मिली बड़ी राहत

भले ही नया टैरिफ लागू कर दिया गया हो, लेकिन कई महत्वपूर्ण कैटेगरीज़ को इस अतिरिक्त ड्यूटी से पूरी तरह बाहर (Exempted) रखा गया है। राहत पाने वाले सेक्टर्स में तेल और गैस, फर्टिलाइजर्स, चुनिंदा खाद्य उत्पाद और इलेक्ट्रॉनिक्स (जैसे स्मार्टफोन, लैपटॉप) और फार्मास्यूटिकल्स शामिल हैं। हालांकि, जेनरिक दवाओं (Generic Drugs) को लेकर ट्रंप पहले ही एक अलग फेज्ड टैरिफ प्लान (जिसमें 2 साल बाद 100% और फिर 200% ड्यूटी का प्रावधान है) की घोषणा कर चुके हैं, जिसने फार्मा सेक्टर में अलग चिंता पैदा कर दी है।

भारत सरकार का क्या है रुख?

भारत सरकार ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी जांच के तरीकों को असंगत (Inconsistent) बताया है। भारत का कहना है कि उसने जून 2026 में ही अपनी विदेश व्यापार नीति (Foreign Trade Policy) में संशोधन कर जबरन श्रम से बने सामानों के आयात को प्रतिबंधित कर दिया था, जिसके चलते ही वह 12.5% के बजाय 10% के स्लैब में आया है। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय लगातार अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में है और दोनों देशों के बीच एक अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) पर बातचीत जारी है, ताकि बातचीत के जरिए निर्यातकों को इस संकट से पूरी तरह राहत दिलाई जा सके।

Latest Posts