एयरपोर्ट जैसे आधुनिक लुक वाले रेलवे स्टेशन: कौन होगा इनका मालिक और क्या है पीपीपी मॉडल का पूरा सच

एयरपोर्ट जैसे आधुनिक लुक वाले रेलवे स्टेशन: कौन होगा इनका मालिक और क्या है पीपीपी मॉडल का पूरा सच

भारतीय रेलवे में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है जिसके तहत देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों को अब आधुनिक एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। इन स्टेशनों पर यात्रियों को वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं, शानदार वेटिंग लाउंज, रूफ प्लाजा, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और वाई-फाई जैसी हाई-टेक सुविधाएं मिलेंगी। लेकिन इस कायाकल्प के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इन भव्य स्टेशनों का असली मालिक कौन होगा और क्या सरकार इन्हें निजी हाथों में सौंप रही है? आइए पीपीपी मॉडल के जरिए काम करने के इस पूरे तंत्र को बेहद आसान भाषा में समझते हैं।

पीपीपी मॉडल क्या है और रेलवे स्टेशनों पर यह कैसे काम करता है

पीपीपी यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप एक ऐसा मॉडल है जिसमें सरकार और निजी क्षेत्र की कंपनियां मिलकर किसी बड़े प्रोजेक्ट पर काम करती हैं। रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास में भी इसी मॉडल का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें रेलवे अपनी जमीन और स्टेशन का ढांचा उपलब्ध कराता है, जबकि निजी कंपनियां यानी प्राइवेट इन्वेस्टर्स भारी-भरकम पूंजी निवेश करके स्टेशन का आधुनिकीकरण करती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में निर्माण से लेकर उसके रख-रखाव तक की जिम्मेदारी एक तय समय सीमा के लिए निजी कंपनियों के हाथों में दी जाती है, जिससे सरकार पर वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ता और काम बेहद तेज गति से पूरा होता है।

स्टेशनों का कायाकल्प होने के बाद भी मालिकाना हक किसके पास रहता है

अक्सर लोगों के मन में यह भ्रम रहता है कि एयरपोर्ट या स्टेशनों को प्राइवेट हाथों में देने का मतलब उनका निजीकरण करना है, लेकिन रेलवे स्टेशनों के मामले में ऐसा बिल्कुल नहीं है। रेलवे स्टेशनों की जमीन और संपत्ति का अंतिम मालिकाना हक हमेशा भारतीय रेलवे यानी सरकार के पास ही रहता है। निजी कंपनियों को केवल एक निश्चित लीज पीरियड यानी पट्टे की अवधि के लिए कॉमर्शियल ऑपरेशन और मैनेजमेंट अधिकार दिए जाते हैं। इसका मतलब यह है कि प्राइवेट कंपनियां वहां बनी कमर्शियल जगहों, मॉल और दुकानों से मुनाफा कमा सकती हैं, लेकिन स्टेशन की मुख्य संपत्ति हमेशा सरकारी नियंत्रण में ही सुरक्षित रहती है।

यात्रियों को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं और क्या बढ़ेंगी सेवाएं

इस आधुनिक बदलाव का सबसे बड़ा फायदा आम यात्रियों को मिलने वाला है। स्टेशनों पर भीड़भाड़ को नियंत्रित करने के लिए आगमन और प्रस्थान के मार्ग पूरी तरह अलग किए जा रहे हैं, जिससे यात्रियों को ट्रेन पकड़ने या स्टेशन से बाहर निकलने में कोई परेशानी न हो। इसके अलावा, दिव्यांग जनों के अनुकूल बुनियादी ढांचा, एस्केलेटर, लिफ्ट और आधुनिक खान-पान के आउटलेट्स जैसी सुविधाएं मिलने से सफर का अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से भी एआई-बेस्ड सीसीटीवी कैमरे और आधुनिक स्कैनर लगाए जा रहे हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक पुख्ता हो सकेगी।