क्या 1 जनवरी से चेकबुक के नियमों में होने वाला है बदलाव? RBI ने बताया वायरल मैसेज का सच
सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स जैसे व्हाट्सएप पर इन दिनों एक संदेश बहुत तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि आगामी 1 जनवरी से देश भर के बैंकों में चेकबुक (Cheque Book) और चेक क्लीयरेंस के नियमों में बहुत बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। इस वायरल मैसेज के सामने आने के बाद से बैंक खाताधारकों, कारोबारियों और आम जनता के मन में यह चिंता सताने लगी है कि क्या नए साल से उनके बैंक ट्रांजैक्शन और चेक से जुड़े काम प्रभावित होने वाले हैं। लोग धड़ाधड़ इस मैसेज को एक-दूसरे को फॉरवर्ड कर रहे हैं और यह जानना चाहते हैं कि क्या वाकई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चेक के नियमों में कोई नया संशोधन किया है। इस तरह की अफवाहों और भ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए देश के केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक ने आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट करते हुए इस वायरल संदेश का पूरा सच देश के सामने रख दिया है। यदि आप भी चेक का इस्तेमाल करते हैं और इस तरह की किसी खबर से भ्रमित हुए हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि केंद्रीय बैंक ने इस संबंध में असल में क्या निर्देश जारी किए हैं और वायरल हो रहे दावों में कितनी सच्चाई है।
सोशल मीडिया पर क्या दावा किया जा रहा है और क्यों मचा है बैंक खाताधारकों में हड़कंप
पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट पर वायरल हो रहे उस संदेश में यह दावा किया जा रहा है कि 1 जनवरी से सभी कमर्शियल और प्राइवेट बैंकों के चेक बुक के नियम पूरी तरह बदल जाएंगे, जिसके तहत पुराने चेक अमान्य हो जाएंगे या फिर चेक क्लीयरेंस के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश लागू होंगे। इस तरह के आधे-अधूरे और भ्रामक संदेशों के कारण आम नागरिकों और वरिष्ठ नागरिकों के बीच यह डर बैठ गया है कि कहीं उनके पास रखी पुरानी चेकबुक बेकार तो नहीं हो जाएगी या बैंक से पैसे निकालने में कोई बाधा तो नहीं आएगी। डिजिटल बैंकिंग के इस दौर में आज भी देश के करोड़ों लोग अपने बड़े लेन-देन, व्यावसायिक भुगतानों और सरकारी कार्यों के लिए चेक पर ही भरोसा करते हैं, यही वजह है कि जरा सी नियम बदलने की खबर भी जंगल में आग की तरह फैल जाती है। सोशल मीडिया पर बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के फैलाई जा रही इन जानकारियों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं, जिसके बाद वित्तीय मामलों के जानकारों और खुद केंद्रीय बैंक की नजर इस वायरल दावे पर पड़ी।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आधिकारिक सफाई, जानिए क्या है वायरल मैसेज की असल सच्चाई
लोगों के बीच फैल रहे इस भारी भ्रम और फर्जी दावों पर संज्ञान लेते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्पष्ट शब्दों में यह बयान जारी किया है कि 1 जनवरी से चेकबुक के नियमों में किसी भी प्रकार का नया, अचानक या व्यापक बदलाव करने का कोई भी निर्देश जारी नहीं किया गया है। आरबीआई के उच्च अधिकारियों और आधिकारिक सूत्रों ने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया पर घूम रहा वह मैसेज पूरी तरह से भ्रामक, निराधार और तथ्यहीन है। इसका मतलब यह है कि बैंक खाताधारकों के पास जो मौजूदा चेकबुक रखी हुई है, वह पूरी तरह से वैध है और आगे भी सुचारू रूप से काम करती रहेगी। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने पहले से चले आ रहे पॉजिटिव पे सिस्टम (Positive Pay System) और चेक से जुड़े सुरक्षा मानकों का जिक्र जरूर किया था, जिसे कुछ शरारती तत्वों या गलत समझ वाले लोगों ने तोड़-मरोड़कर नए साल से नए नियम लागू होने की फर्जी अफवाह के रूप में पेश कर दिया। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि जब भी बैंकिंग नियमों में कोई आधिकारिक बदलाव किया जाता है, तो उसकी सूचना सीधे रिजर्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत प्रेस विज्ञप्तियों के माध्यम से दी जाती है।
पॉजिटिव पे सिस्टम (Positive Pay System) और चेक सुरक्षा से जुड़े मौजूदा नियम क्या हैं?
चूंकि फर्जी खबरों के पीछे अक्सर कुछ तकनीकी नियमों की अधूरी जानकारी होती है, इसलिए यह जानना बहुत जरूरी है कि वर्तमान में चेक फ्रॉड को रोकने के लिए आरबीआई का कौन सा नियम लागू है। भारतीय रिजर्व बैंक ने कुछ समय पहले ही 'पॉजिटिव पे सिस्टम' की शुरुआत की थी, जिसके तहत 50,000 रुपये या उससे अधिक राशि के चेक जारी करने पर खाताधारक को अपने बैंक को चेक से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां (जैसे चेक नंबर, तारीख, राशि और खाता धारक का नाम) डिजिटल माध्यम से पहले ही कंफर्म करनी होती हैं। यह नियम चेक क्लीयरेंस को अधिक सुरक्षित बनाने और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या जालसाजी को रोकने के लिए लाया गया था, और यह कोई नया नियम नहीं है बल्कि पिछले कई सालों से देश के सभी बैंकों में सफलतापूर्वक काम कर रहा है। इसी पुरानी और स्थापित व्यवस्था को सोशल मीडिया पर नए साल के नाम पर एक बार फिर से सनसनीखेज बनाकर पेश किया जा रहा है, जिसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।
बैंक ग्राहकों के लिए जरूरी सलाह: सोशल मीडिया की अफवाहों से कैसे बचें?
आज के डिजिटल और सोशल मीडिया के युग में यह बहुत आम हो गया है कि किसी भी पुरानी या सामान्य जानकारी को गलत तरीके से पेश करके सनसनी फैला दी जाए, ताकि लोग डरकर उसे शेयर करें। भारतीय रिजर्व बैंक और देश के सभी प्रमुख बैंकों (जैसे एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई आदि) ने अपने ग्राहकों से बार-बार अपील की है कि वे इस तरह के किसी भी अनधिकृत और वायरल मैसेज पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। यदि आपको बैंकिंग नियमों, लोन, ब्याज दरों या चेकबुक से जुड़ा कोई भी संदेश प्राप्त होता है, तो सबसे पहले अपने संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या उसके कस्टमर केयर से उसकी पुष्टि जरूर कर लें। किसी भी फर्जी संदेश को फॉरवर्ड करने से बचें क्योंकि इससे समाज में अनावश्यक डर और भ्रम फैलता है। कुल मिलाकर, 1 जनवरी से चेकबुक के नियमों में किसी बदलाव की बात पूरी तरह अफवाह है, और आपकी पुरानी चेकबुक पूरी तरह से सुरक्षित और मान्य है।