UP Kiran,Digital Desk: मनरेगा बचाओ जनचौपाल जन अधिकार यात्रा के चौथे दिन नेवादा, ब्यूर, माधोपुर, दुसौती और समोधीपुर गांवों में आयोजित चौपालों में ग्रामीणों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस यात्रा का उद्देश्य देश भर में मनरेगा की महत्वता और श्रमिकों के अधिकारों के समर्थन में जागरूकता फैलाना था। इन गांवों में आयोजित जनचौपालों में मुख्य रूप से युवा, महिला और किसान समुदाय के लोग शामिल हुए। उन्होंने मनरेगा योजना की महत्ता को स्वीकार करते हुए इसे कमजोर करने वाली वर्तमान नीतियों का विरोध किया।
महात्मा गांधी का दृष्टिकोण और मनरेगा की भूमिका
चौपाल का आयोजन विशेष रूप से डॉ भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के समीप किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने महात्मा गांधी के विचारों को याद किया, जिन्होंने हमेशा शोषित और वंचित वर्ग के अधिकारों की बात की थी। उनका यह मानना था कि देश की असली प्रगति तब संभव है, जब गरीब, मजदूर और किसान वर्ग को उनका हक मिलें। मनरेगा योजना को भी गांधीजी के समान विचारों से प्रेरित बताया गया। हालांकि, इस योजना को वर्तमान में कमजोर किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
125 किलोमीटर का सफर: जन अधिकार यात्रा का व्यापक प्रभाव
यह यात्रा करीब 125 किलोमीटर की दूरी तय करती हुई 225 ग्राम पंचायतों से गुजरेगी। यात्रा का उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक मनरेगा और श्रमिक अधिकारों के मुद्दे को पहुंचाना है। 11 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा का समापन वाराणसी के राजघाट पर होगा। यात्रा के दौरान प्रत्येक 15 किलोमीटर पर एक बड़ा जनचौपाल आयोजित किया जा रहा है, जिसमें श्रमिक, किसान, महिलाएं और युवा वर्ग बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। इससे यह साबित होता है कि मनरेगा योजना से जुड़ी समस्याओं को लेकर ग्रामीणों में गहरी चिंता है और वे इसके बचाव के लिए एकजुट हो रहे हैं।
यात्रा में भाग लेने वाले प्रमुख नेता
इस यात्रा में युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष जितेश कुमार मिश्रा, एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव अक्षय यादव क्रांतिवीर, पूर्व ज़िला पंचायत सदस्य रमेश भारतीय, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष आयुष नारायण मिश्रा सहित कई अन्य नेताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन नेताओं ने गांव-गांव जाकर लोगों के बीच मनरेगा और श्रमिक अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।




