शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी की मुश्किलें बढ़ी, इस मामले में CBI ने दर्ज की 2 FIR

वक्फ की संपत्तियों की अवैध खरीद-फरोख्त करने का मामला

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने वक्फ की संपत्तियों की अवैध खरीद-फरोख्त के मामले में उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की हैं। यह कार्रवाई सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने की है और इसी के साथ इलाहाबाद व कानपुर में वक्फ संपत्तियों के हस्तांतरण में हुई धोखाधड़ी के मामले की सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है।

waseem rizvi

सीबीआई के प्रवक्ता ने शुक्रवार को बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने वक्फ की संपत्तियों की अवैध खरीद-फरोख्त व धोखाधड़ी को लेकर 8 अगस्त 2016 को इलाहाबाद (प्रयागराज) में एक मामला वसीम रिजवी के खिलाफ दर्ज किया गया था। दूसरा मामला 2017 में लखनऊ में दर्ज किया गया। इलाहाबाद मामला 2016 में इमामबाड़ा गुलाम हैदर में कथित अतिक्रमण और दुकानों के अवैध निर्माण से जुड़ा है, जबकि लखनऊ मामला 2009 में कानपुर के स्वरूप नगर में जमीन कब्जाने के आरोपों का है।

लखनऊ मामले में कुल पांच आरोपित पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी, शिया वक्फ बोर्ड के प्रशासनिक अधिकारी गुलाम सैयद रिजवी, वक्फ इंस्पेक्टर वाकर रजा, नरेश कृष्ण सोमानी और विजय कृष्ण सोमानी को नामजद किया गया है।

इसके अलावा हाल ही में रिजवी और उनके दो अन्य सहयोगियों के खिलाफ बिजनौर स्थित जोगीपुरा धर्मस्थल के कार्यवाहक को जबरन वसूली और धमकी देने के आरोप में पुलिस ने मामला दर्ज किया है। यह केस स्थानीय अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के निर्देश पर दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता सैयद क़ैसर बकरी का आरोप है कि रिजवी ने उन्हें 2018 में शिया वक्फ बोर्ड के प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान धर्मस्थल के प्रशासक के रूप में नियुक्त किया था। बाद में रिजवी और उनके सहयोगियों ने उनसे पैसों की मांग करनी शुरू कर दी।

बकरी का दावा है कि उन्होंने दान के माध्यम से प्राप्त लाखों रुपये रिज़वी और उनके सहयोगियों के बैंक खातों में जमा कराए हैं। उनका कहना है कि जून 2019 में, रिजवी और उनके सहयोगियों की मांग और बढ़ गई। उन्होंने 10 लाख रुपये का भुगतान करने से मना कर दिया। इसके बाद रिजवी का रुख सख्त हो गया और उन्हें बर्खास्त करने की धमकी दी गई।

उपरोक्त दोनों मामले संज्ञान में आने के बाद अपर मुख्य सचिव गृह, अवनीश अवस्थी ने अक्टूबर 2019 में, कार्मिक, लोक शिकायत विभाग, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग से शिया सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड एवं यूपी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड की क्रय-विक्रय एवं स्थान्तरित संपत्तियों की सीबीआई जांच के लिए पत्र लिखा। केन्द्र ने इसे स्वीकार कर लिया। इसके बाद सीबीआई ने वसीम रिजवी के खिलाफ वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की खरीद और बिक्री में धोखाधड़ी की शिकायत से संबंधित दो एफआईआर दर्ज की है। इससे शिया सेंट्रल बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी की मुसीबत बढ़ गई है।

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