Up kiran,Digital Desk : बिहार के खगड़िया से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ के श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की 15 सदस्यों वाली एक टीम अचानक जांच के लिए पहुँच गई। किसी को कानों-कान खबर नहीं थी कि ऐसा कुछ होने वाला है। सुबह 10 बजे शुरू हुई यह कार्रवाई पूरी रात चली और देर रात 2 बजे जाकर खत्म हुई।
16 घंटे तक क्या हुआ कॉलेज के अंदर?
जैसे ही ईडी की टीम कॉलेज कैंपस में दाखिल हुई, पूरे कॉलेज की सुरक्षा चाक-चौबंद कर दी गई। मेन गेट पर ताला लगा दिया गया और किसी को भी अंदर-बाहर आने-जाने की इजाजत नहीं थी। टीम ने कॉलेज के अलग-अलग हिस्सों की बारीकी से तलाशी ली और जरूरी सबूत और दस्तावेज खंगालने में जुटी रही।
जिस वक्त यह छापा पड़ा, कॉलेज के डायरेक्टर विवेकानंद वहां मौजूद नहीं थे, लेकिन उनके भाई इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार वहीं थे, जिनसे ईडी के अधिकारियों ने लंबी पूछताछ की।
कॉलेज ने कहा – "यह हमें तोड़ने की साजिश है"
देर रात जब ईडी की टीम गई, तो इंजीनियर धर्मेंद्र ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर पूरी बात बताई। उन्होंने कहा कि टीम अपने साथ जमीन से जुड़े कागज, कंप्यूटर की हार्ड डिस्क, अटेंडेंस रजिस्टर और कॉलेज को मिली मान्यता से जुड़ी कई अहम फाइलें ले गई है।
उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को एक "अबूझ पहेली" बताते हुए कहा कि यह हमारे "मनोबल को तोड़ने की साजिश" है। उन्होंने कहा, "हमारे कॉलेज ने नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के कई सख्त निरीक्षण पास किए हैं और सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़कर 100 MBBS सीटों की मान्यता हासिल की है। हमारे खिलाफ सीबीआई ने भी कोई चार्जशीट नहीं दायर की है, फिर भी यह छापेमारी क्यों हुई, यह समझ से परे है।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मेडिकल कॉलेज खगड़िया के लोगों के सहयोग से बना है और हम किसी भी तरह के दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। फिलहाल, ईडी की इस अचानक और इतनी लंबी कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब का सभी को इंतजार है।


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