कोरोना वायरस मानसिक स्वास्थ्य को भी पहुंचाता है चोट, डिप्रेशन- एंग्जाइटी जैसी तकलीफों से जूझ रहे काफी मरीज

कोरोना वायरस की महामारी के शुरुआती दौर में लोगों ने यह समझा था। कि यह बीमारी कुछ हफ्ते में ठीक हो जाती है। लेकिन कोरोना वायरस से जुड़े नए डेटा में सामने आया है कि हजारों मरीज कई महीने तक कोरोना के लक्षणों से परेशान हैं।

नई दिल्ली: कोरोना वायरस की महामारी के शुरुआती दौर में लोगों ने यह समझा था। कि यह बीमारी कुछ हफ्ते में ठीक हो जाती है। लेकिन कोरोना वायरस से जुड़े नए डेटा में सामने आया है कि हजारों मरीज कई महीने तक कोरोना के लक्षणों से परेशान हैं। वहीं इसके असर के तौर पर मरीजों को मानसिक तकलीफों को भी झेलना पड़ रहा है। आपको बता दे कोरोना वायरस से मध्यम या गंभीर बीमार लोग जिनमें कोरोना के लक्षण कई महीने तक रहते हैं। उन्हें (Long-haulers) कहा जाता है।

कोरोना से उनके मानसिक स्वास्थ्य को भी चोट पहुंचाता है। वहीं एक छोटे आकार के सर्वे में पता चला कि दर्जनों लोग इसकी वजह से एंग्जाइटी और डिप्रेशन के शिकार हैं। बता दे यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के मनोचिकित्सक टी पोस्टोलाचे के अनुमान के मुताबिक आधे या एक तिहाई कोरोना मरीज किसी न किसी तरह के मानसिक बीमारी से परेशान हैं। वहीं असामान्य नींद, डिप्रेशन, थकान और एंग्जाइटी इसमे मुख्य लक्षण हैं। ब्रिटेन में अब तक कुल 3 लाख 50 हजार कोरोना मरीज सामने आए हैं। मगर आकलन के मुताबिक, करीब 60 हजार लोग तीन महीने से अधिक वक्त तक कोरोना के लक्षणों से लड़ाई लड़ रहे थे। वहीं इंडियाना यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के रिसर्चर ने हाल ही में 1500 Long-haulers पर सर्वे किया. जिसमे उन्होंने पाया काफी संख्या में ऐसे लोग हैं। जो मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। आपको बता दे लंबे वक्त तक कोरोना से पीड़ित रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं लेने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिसकी वजह से उनकी मानसिक स्थिति और खराब रही है। और इसकी ही वजह से लोगों की नौकरी, सोशल साइफ और सामान्य दिनचर्या पर भी असर पड़ रहा है.

 

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