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Up kiran,Digital Desk : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने तेवरों से दुनिया को चौंका दिया है। इस बार उनके निशाने पर अमेरिका का सबसे करीबी दोस्त ब्रिटेन है। ट्रंप ने हिंद महासागर में स्थित रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण डिएगो गार्सिया (Diego Garcia) द्वीप को मॉरीशस को सौंपने के ब्रिटेन सरकार के फैसले का कड़ा विरोध किया है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि ईरान के साथ चल रही परमाणु वार्ता विफल होती है, तो ईरान पर सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिका को डिएगो गार्सिया द्वीप की सख्त जरूरत पड़ेगी।

प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से ट्रंप की सीधी अपील

राष्ट्रपति ट्रंप ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को आगाह करते हुए कहा कि डिएगो गार्सिया पर नियंत्रण खोना एक 'ऐतिहासिक भूल' साबित होगी। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए ट्रंप ने लिखा, "मैं प्रधानमंत्री स्टार्मर से कहता रहा हूं कि देशों के मामलों में 'लीज' या पट्टे का कोई भरोसा नहीं होता। चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपकर ब्रिटेन अपनी पकड़ कमजोर कर रहा है।" ट्रंप ने यह भी भरोसा दिलाया कि यदि इस द्वीप की रक्षा के लिए जरूरत पड़ी, तो अमेरिका ब्रिटेन के लिए लड़ने को भी तैयार है, लेकिन ब्रिटेन को पीछे नहीं हटना चाहिए।

ईरान पर हमले का मास्टर प्लान और डिएगो गार्सिया

ट्रंप की इस चिंता के पीछे गहरा सैन्य कारण छिपा है। डिएगो गार्सिया हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित है, जहाँ से अमेरिकी बमवर्षक विमान (Bombers) आसानी से पश्चिम एशिया और ईरान तक पहुंच सकते हैं। ट्रंप ने संकेत दिया कि जिनेवा में ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत अंतिम दौर में है, लेकिन अगर ईरान समझौता नहीं करता है, तो डिएगो गार्सिया अमेरिका का सबसे प्रमुख सैन्य लॉन्चपैड होगा।

क्या है डिएगो गार्सिया का विवाद?

मॉरीशस को 1968 में ब्रिटेन से आजादी मिली थी, लेकिन ब्रिटेन ने चागोस द्वीप समूह (जिसमें डिएगो गार्सिया शामिल है) को अपने नियंत्रण में रखा। अंतरराष्ट्रीय दबाव और 2019 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के फैसले के बाद, 2025 में ब्रिटेन सरकार ने इस द्वीप समूह को मॉरीशस को लौटाने का एलान किया। समझौते के तहत, डिएगो गार्सिया पर अमेरिका-ब्रिटेन का सैन्य अड्डा 99 साल की लीज पर बना रहेगा। हालांकि, ट्रंप को डर है कि संप्रभुता बदलने के बाद भविष्य में इस सैन्य अड्डे के अस्तित्व पर खतरा मंडरा सकता है।

रणनीतिक महत्व: क्यों अहम है यह द्वीप?

डिएगो गार्सिया को हिंद महासागर का 'अविनाशी विमानवाहक पोत' (Unsinkable Aircraft Carrier) कहा जाता है।

यहाँ से अमेरिका पूरे मध्य पूर्व, अफ्रीका और एशिया पर नजर रखता है।

यहाँ परमाणु पनडुब्बियों और लंबी दूरी के विमानों के लिए विशाल ईंधन डिपो और रनवे मौजूद हैं।

ईरान के खिलाफ किसी भी बड़े हवाई अभियान के लिए यह द्वीप भौगोलिक रूप से सबसे सुरक्षित और प्रभावी ठिकाना माना जाता है।