Up kiran,Digital Desk : संसद में पेश हुए 'आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26' ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति को विस्तार से पेश किया। सरकार ने अगले वित्त वर्ष (FY27) में GDP ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान जताया। हालांकि, कमजोर रुपये और बढ़ती कमोडिटी कीमतों को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
महंगाई: खतरे और राहत दोनों
सर्वे के अनुसार, महंगाई दर में थोड़ी बढ़ोतरी संभव है, लेकिन यह आरबीआई के तय दायरे में रहेगी।
खतरा: रुपये में गिरावट के चलते विदेशी सामान महंगा हो सकता है, जिसे इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन कहा जाता है। सोना, चांदी और तांबे जैसी धातुओं की बढ़ती कीमतें कोर इन्फ्लेशन पर दबाव डाल सकती हैं।
राहत: ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतें घट रही हैं। अच्छी फसल के चलते खाने-पीने की वस्तुएं महंगी नहीं होंगी।
व्यापार और उद्योग पर असर
भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते के बाद भारतीय कंपनियों को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
ऑटो सेक्टर: यूरोप से आने वाली कारों पर आयात शुल्क 110% से घटकर 10% होने जा रहा है। इससे टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी कंपनियों को कड़ी टक्कर मिल सकती है।
वाइन इंडस्ट्री: यूरोप की वाइन सस्ती होगी, जिसका असर भारत की प्रमुख वाइन कंपनी 'सुला विनयार्ड्स' पर पड़ सकता है।
ब्याज दरों में कटौती की संभावना
महंगाई को नियंत्रित रखने और ग्रोथ को समर्थन देने के लिए आरबीआई अगले हफ्ते ब्याज दरों में 0.25% की कटौती कर सकता है। यह इस साइकिल की आखिरी कटौती हो सकती है, जिससे होम लोन और कार लोन लेने वालों को राहत मिलने की उम्मीद है।


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