Up kiran,Digital Desk : फिल्म ‘धुरंधर’ रिलीज के 28 दिन बाद भी सिनेमाघरों में मजबूती से टिके हुए हैं, और नई फिल्मों की रिलीज़ इसका रुतबा कम नहीं कर रही। इसी बीच 1 जनवरी को वॉर ड्रामा फिल्म ‘इक्कीस’ सिनेमाघरों में आई। यह फिल्म सिर्फ 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बलिदान देने वाले परमवीर चक्र विजेता सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की बायोपिक नहीं है, बल्कि युद्ध के दर्द और मानवीय भावनाओं को भी सामने लाती है।
आइए जानते हैं ‘इक्कीस’ को खास बनाने वाली पांच बातें:
1. शानदार स्टार कास्ट और दमदार अभिनय
फिल्म का सबसे बड़ा फायदा इसकी कास्टिंग और अभिनय है। अगस्त्य नंदा ने यंग आर्मी ऑफिसर अरुण खेत्रपाल का किरदार निभाया है और अपने रोल में पूरी तरह फिट बैठे। उन्होंने अपने किरदार के लिए कड़ी मेहनत की है। इसके अलावा फिल्म में धर्मेंद्र, जयदीप अहलावत, असरानी, दीपक डोबरियाल, सिकंदर खेर, राहुल देव और सुहासनी मुले जैसे कलाकार हैं, जो अपने किरदारों में पूरी तरह घुले-मिले नजर आते हैं।
2. धर्मेंद्र और असरानी की यादगार भूमिका
‘इक्कीस’ में सबसे ज्यादा चर्चा धर्मेंद्र के अभिनय की भी है। यह उनकी आखिरी फिल्म है और स्क्रीन पर उनके दृश्य दर्शकों को भावुक कर देते हैं। कुछ सीन में उनके डायलॉग गांव और बचपन की यादें ताजा कर देते हैं। इसके अलावा असरानी का कैमियो भी फिल्म में देखने लायक है। दोनों ही कलाकार अब हमारे बीच नहीं हैं, इसलिए यह उनके फैंस के लिए खास अनुभव बनाता है।
3. सिर्फ बायोपिक नहीं, इमोशनल कहानी भी
फिल्म का सशक्त अभिनय इसलिए भी असरदार है क्योंकि कहानी में भावनाओं का समावेश है। यह सिर्फ युद्ध की बायोपिक नहीं है, बल्कि इसमें बंटवारे का दर्द और मानवीय संवेदनाएँ भी दिखाई गई हैं। कहानी का यह अंदाज दर्शकों के दिल को छू जाता है।
4. निर्देशन में निखार, खामोशी भी बोलती है
निर्देशक श्रीराम राघवन ने ‘इक्कीस’ में वॉर ड्रामा को नए अंदाज में पेश किया है। फिल्म में शोर-शराबा नहीं है; कई सीन में खामोशी और धीमी गति से कहानी को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया गया है। फिल्म अंत में युद्ध को लेकर गहन सवाल दर्शकों के जेहन में छोड़ जाती है।
5. वॉर सीन में वास्तविकता, वीएफएक्स सीमित
फिल्म के युद्ध दृश्यों में VFX का कम उपयोग किया गया है। आमतौर पर वॉर फिल्मों में वीएफएक्स पर जोर रहता है, लेकिन ‘इक्कीस’ में दृश्यों को असलियत के करीब रखा गया है। इससे फिल्म में युद्ध का भावनात्मक और यथार्थपरक अनुभव दर्शकों तक पहुंचता है।




