Up kiran,Digital Desk : सात साल का लंबा इंतजार खत्म हुआ! पंजाब के गांव एक बार फिर चुनावी रंग में सराबोर होने जा रहे हैं। जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव की घोषणा के साथ ही गांव की गलियों से लेकर चौपाल तक, हर जगह बस सियासी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। ये चुनाव सिर्फ गांव की सरकार चुनने के लिए नहीं हैं, बल्कि ये पंजाब की बड़ी राजनीति का रुख तय करने वाले हैं।
यह चुनाव एक तरह से सभी पार्टियों के लिए लिटमस टेस्ट जैसा है। इससे पता चलेगा कि पंजाब के ग्रामीण इलाकों में बसे करीब 1 करोड़ 36 लाख वोटरों के दिल में कौन सी पार्टी बसती है। पंजाब की राजनीति में हमेशा से ही गांवों का दबदबा रहा है, चाहे लोकसभा चुनाव हों या विधानसभा। इसलिए इन चुनावों के नतीजों को 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल भी माना जा रहा है।
इस बार मुकाबला और भी दिलचस्प है क्योंकि प्रचार के लिए सभी पार्टियों को सिर्फ एक हफ्ते का ही समय मिलेगा। इतने कम समय में वोटरों तक पहुंचना और उन्हें मनाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा।
आज के सियासी समीकरण क्या कहते हैं?
अगर 2018 की बात करें तो तस्वीर कुछ और थी। तब कांग्रेस सत्ता में थी और उसे चुनावों में अच्छी-खासी बढ़त मिली थी। अकाली दल भी कुछ जगहों पर जीतने में कामयाब रहा था और आम आदमी पार्टी अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रही थी। लेकिन आज सियासी समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार है और उस पर खुद को साबित करने का दबाव है। कांग्रेस आपसी खींचतान से जूझ रही है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) बिखरा हुआ है और अपने पुराने वोट बैंक को वापस पाने की कोशिश में लगा है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी गांवों में अपनी जमीन मजबूत करने में जुटी है। मतलब, मुकाबला चारों कोनों से है और कोई भी पार्टी इसे हल्के में नहीं ले रही है।
किस पार्टी का क्या है दावा?
भाजपा: भाजपा का कहना है कि उनकी तैयारी पूरी है और वे पूरे दमखम से चुनाव लड़ेंगे। पार्टी के प्रदेश महामंत्री राकेश राठौड़ का मानना है कि गांवों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर लोगों का भरोसा बढ़ा है और भाजपा का जनाधार पहले से मजबूत हुआ है।
अकाली दल: वहीं, अकाली दल भी पूरे जोश में है। पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत चीमा के मुताबिक, लोग अकाली दल के पुराने कार्यकाल को याद कर रहे हैं और पार्टी को गांवों में अच्छा समर्थन मिल रहा है। उनका दावा है कि इन चुनावों में अकाली दल मजबूती से वापसी करेगा।
आम आदमी पार्टी: सत्ताधारी आम आदमी पार्टी इसे अपने काम पर मुहर लगने का मौका मान रही है। वित्तमंत्री हरपाल चीमा का कहना है कि पार्टी बड़ी जीत दर्ज करेगी। सरकार के सभी मंत्री और विधायक प्रचार में उतरेंगे और लोगों को अपने काम के बारे में बताएंगे।
कांग्रेस: 2018 की जीत से उत्साहित कांग्रेस भी पीछे नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का कहना है कि इस बार भी कांग्रेस का प्रदर्शन शानदार रहेगा। पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी और सही उम्मीदवारों को मैदान में उतारेगी।
कुल मिलाकर, पंजाब के गांवों में चुनावी माहौल गरमा चुका है। ये चुनाव न सिर्फ पार्टियों की मौजूदा ताकत का आईना होंगे, बल्कि यह भी दिखाएंगे कि 2027 के लिए पंजाब की जनता का मूड किस तरफ है।
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