'बिहार के ब्रैड पिट' रवि किशन का सेंसरशिप पर बड़ा हमला: 'मिर्जापुर: द मूवी' से पहले बोले—सिनेमा में मर्यादा जरूरी

'बिहार के ब्रैड पिट' रवि किशन का सेंसरशिप पर बड़ा हमला: 'मिर्जापुर: द मूवी' से पहले बोले—सिनेमा में मर्यादा जरूरी

भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार और बीजेपी सांसद रवि किशन अक्सर अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। एक वक्त पर खुद को मजाकिया लहजे में 'बिहार का ब्रैड पिट' कहने वाले रवि किशन ने अब फिल्म इंडस्ट्री और वेब सीरीज में दिखाई जा रही अश्लीलता और गाली-गलौज पर तीखा प्रहार किया है। बहुप्रतीक्षित फिल्म 'मिर्जापुर: द मूवी' (Mirzapur: The Movie) की रिलीज से ठीक पहले रवि किशन का यह बयान सिनेमाई गलियारों में एक नई बहस छेड़ चुका है।

फिल्मों में सेंसरशिप और मर्यादा पर उठाए सवाल

एक हालिया इंटरव्यू में रवि किशन ने फिल्मों और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर परोसी जा रही बोल्ड और हिंसक सामग्री पर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मनोरंजन के नाम पर भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। रवि किशन ने जोर देकर कहा कि फिल्मों में एक 'मर्यादा' होनी चाहिए ताकि पूरा परिवार एक साथ बैठकर सिनेमा का आनंद ले सके। उन्होंने सेंसरशिप को और अधिक सख्त बनाने की वकालत भी की।

'मिर्जापुर: द मूवी' की रिलीज से पहले गरमाया माहौल

रवि किशन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब लोकप्रिय वेब सीरीज 'मिर्जापुर' अब बड़े पर्दे पर 'मिर्जापुर: द मूवी' के रूप में दस्तक देने की तैयारी कर रही है। चूंकि 'मिर्जापुर' फ्रैंचाइजी अपनी अत्यधिक हिंसा, बोल्ड सीन्स और गालियों के लिए जानी जाती है, इसलिए रवि किशन के इस बयान को सीधे तौर पर इस तरह के सिनेमाई कंटेंट पर एक बड़े तंज के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को सही दिशा दिखाने के लिए सिनेमा का साफ-सुथरा होना जरूरी है।

'बिहार का ब्रैड पिट' से पार्लियामेंट तक का सफर

रवि किशन ने अपने संघर्ष के दिनों और स्टारडम को याद करते हुए मजाक में खुद को 'बिहार का ब्रैड पिट' कहे जाने वाले दौर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक कलाकार के रूप में उन्होंने हर तरह का काम किया है, लेकिन एक जनप्रतिनिधि और समाज के जिम्मेदार नागरिक होने के नाते वे अब यह महसूस करते हैं कि सिनेमा को समाज के प्रति जवाबदेह होना होगा। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी फैंस दो गुटों में बंट गए हैं—एक जो रवि किशन की बात का समर्थन कर रहा है और दूसरा जो इसे रचनात्मक स्वतंत्रता (Creative Freedom) पर हमला बता रहा है।

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