चौबीसों घंटे रेडियो पर बजता था सिर्फ यही एक गाना, रफी साहब की आवाज का वो किस्सा जो आज के सिंगर्स सोच भी नहीं सकते

चौबीसों घंटे रेडियो पर बजता था सिर्फ यही एक गाना, रफी साहब की आवाज का वो किस्सा जो आज के सिंगर्स सोच भी नहीं सकते

आज के दौर में जब कोई गाना सोशल मीडिया पर ट्रेंड करता है तो हम उसे 'रील्स का जादू' कहते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि सत्तर साल पहले भी एक ऐसा दौर था जब बिना इंटरनेट के एक गाना पूरे देश के सिर चढ़कर बोल रहा था। यह कहानी संगीत के शहंशाह मोहम्मद रफी के उस दौर की है जब उनकी जादुई आवाज ने भारतीय रेडियो के इतिहास में एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज कर दिया जिसे आज के दौर में तोड़ पाना नामुमकिन है।

जब हर रेडियो स्टेशन पर गूंजती थी सिर्फ एक ही आवाज

बात पचास के दशक की है जब देश में रेडियो ही मनोरंजन का इकलौता और सबसे बड़ा साधन हुआ करता था। उस दौर के दिग्गज संगीतकार खय्याम ने अपने एक इंटरव्यू में इस दिलचस्प किस्से का खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि रफी साहब का गाया एक खास गाना उस वक्त पूरे देश की धड़कन बन चुका था जिसे 'रेज ऑफ द नेशन' कहा गया।

आलम यह था कि आप दिन या रात के किसी भी पहर में रेडियो ऑन करते तो देश के किसी न किसी कोने या स्टेशन से वही गाना प्रसारित हो रहा होता था। चौबीसों घंटे गूंजने वाला यह गाना संगीत प्रेमियों के लिए एक ऐसा नशा बन गया था जिससे उबर पाना उस दौर की जनता के लिए मुमकिन नहीं था।

एक भूली बिसरी फिल्म और अमर संगीत का कनेक्शन

यह ऐतिहासिक गाना साल 1950 में आई एक बेहद कम चर्चित फिल्म 'बीवी' का था। इस फिल्म के बारे में आज के सिनेमा प्रेमियों को शायद ही ज्यादा जानकारी मिले। किशोर शर्मा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में प्राण, अल नासिर और मुमताज शांति जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म भले ही वक्त के साथ इतिहास के पन्नों में कहीं खो गई मगर इसका एक गाना 'अकेले में वो घबराते तो होंगे, मिटाके मुझको पछताते तो होंगे' हमेशा के लिए अमर हो गया। संगीतकार खय्याम की धुनों पर जब मोहम्मद रफी ने अपने दर्द को आवाज में पिरोया तो सुनने वाले बस अपनी सुध-बुध खो बैठे।

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