हरियाणा की मंडियों में फसल नहीं बेंच पाएंगे यूपी, राजस्थान के किसान, सीएम खट्टर ने कही ये बात

नई दिल्ली। एक अप्रैल से पंजाब और हरियाणा समेत देश के अधिकांश राज्यों की मंडियों में गेहूं की खरीद शुरु हो गई है। इस बीच कोरोना संक्रमण के चलते हरियाणा सरकार ने मंडियों में ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल’ पर किसानों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। अब इस इस पोर्टल पर पंजीकरण न हो पाने की वजह से हरियाणा के किसान मंडियों में फसल नहीं बेच पा रहे हैं। इस नियम के चलते यूपी और राजस्थान के किसान भी हरियाणा की मंडियों में गेहूं की फसल नहीं बेच पाएंगे। नए कृषि कानूनों के समर्थन में प्रधानमंत्री समेत पूरी सरकार कह रही है कि किसान अपने उत्पाद देश में कहीं भी बेंच सकते हैं।

जानकारी के मुताबिक़ हरियाणा में नए नियम के तहत पंजीकृत किसानों को एक दिन पहले एसएमएस पर फसल लाने बारे सूचित किया जाता है। पोर्टल पर सौ फीसदी किसानों के पंजीकरण के दावे के विपरित अभी तक आधे किसानों का भी पंजीकरण नहीं हुआ है। सरकार ने अब दो दिन 5 व 6 अप्रैल को पोर्टल फिर से खोलने की अनुमति दी है। कई जहां पर पोर्टल पर पंजीकृत किसान एसएमएस मिलने के बावजूद गेहूं लेकर नहीं पहुंचे तो कई जगहों पर बिना मैसेज के ही किसान गेहूं लेकर मंडियों में पहुंच गए। इस तरह अधिकांश मंडियों में अफरातफरी का माहौल दिख रहा है। इन हालातों से परेशान किसानों ने हरियाणा के कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं।

कहने को तो सरकार ने सीधे किसानों के बैंक खाते में फसलों के भुगतान का फैसला किया है, लेकिन आढ़तियों के ढाई फीसदी कमीशन को लेकर पेंच फंसा हुआ है। किसानों को भुगतान के मसले पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा था कि संबंधित जिला उपायुक्त सुनिश्चित करें कि जे-फार्म जारी होने के 24 घंटे के अंदर फसल का उठान हो जाए और 72 घंटे में पैसा किसान के खाते में पहुंच जाए। 72 घंटे मेंं भुगतान न होने के स्थिति में केंद्रीय खरीद एजेंसी एफसीआई नौ फीसदी वार्षिक ब्याज दर से किसान को ब्याज का भुगतान करेगी।

उल्लेखनीय है कि इस बार हरियाणा में रिकार्ड स्तरपर सरकारी गेहूं की खरीद की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन सरकार के नए नियमों से किसान हलकान हैं। किसानों के विरोध पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि पहले हरियाणा के किसानों की फसलें खरीदी जाएंगी। उसके बाद अन्य प्रदेशों के किसानों की फसल खरीदने पर विचार होगा। भारतीय किसान यूनियन ने हरियाणा सरकार द्वारा ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर किसानों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिए जाने का सख्त विरोध किया है।

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