किसानों का दिल्ली कूच : सिंघु बॉर्डर पर स्थिति तनावपूर्ण, अब किसान इस हद तक उतरे

दिल्ली-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर 10 किलोमीटर से ज्यादा लंबा जाम

चंडीगढ़। कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का दिल्ली कूच थम नहीं रहा। शनिवार को चौथे दिन हरियाणा-दिल्ली सीमा सिंघु बार्डर पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। किसानों ने दिल्ली की ओर आगे बढ़ने की बजाय राष्ट्रीय राजमार्ग पर ही डेरा डाल लिया है, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर 10 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। वहीं बहादुरगढ़ के टीकरी बार्डर पर भी किसानों के ठहराव से स्थिति तनावपूर्ण है।

Farmers traveled to Delhi

किसानों के दिल्ली कूच को लेकर हरियाणा की ओर से दिल्ली में आवागमन पिछले चार दिनों से बंद है। शुक्रवार रात्रि सिंघु बार्डर पर किसानों के पड़ाव से स्थिति तनावपूर्ण हो गई। किसानों ने दिल्ली के बुराड़ी जाने से इंकार करते हुए कृषि कानून विरोध का वहीं बैठकर विरोध जताने का फैसला लिया। राष्ट्रीय राजमार्ग पर किसानों के ठहराव से व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। 10 किलोमीटर लंबे जाम में हजारों की संख्या में फल व सब्जियों के ट्रक फंसे हुए हैं। दिल्ली जाने वाले वाले राहगीर पैदल ही सफर तय कर रहे हैं। जाम खुलवाने के लिए दिल्ली के आला अधिकारी किसानों से बातचीत करने पहुंचे, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

किसानों पर पानी की बौछारों व आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने हरियाणा की भाजपा सरकार को कटघरे में खड़े करते हुए उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पर निशाना साधा। सुरजेवाला ने ट्वीट किया कि जिस किसान कौम से बहला-फुसलाकर भाजपा के खिलाफ वोट लिए, जिस किसान का कर्ज माफ करने का वचन दिया, आज वही किसान सड़कों पर पुलिस की लाठियां खा रहे हैं।

किसान आंदोलन पर इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के छोटे भाई दिग्विजय चौटाला ने केंद्र सरकार से किसानों से बातचीत करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि किसानों के जो भ्रम व शंकाएं है उसे दूर किया जाए। ठंड और कोरोना के चलते मुलाकात में दूरी न हो। मुलाकात 3 दिसम्बर की बजाय आज ही की जाए। इतने दिन किसानों को रोककर रखा न जाए। किसानों की शंकाओं व भ्रम को मंत्री स्तर की वार्ता से दूर किया जाए।

राज्यसंभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि देश का किसान लोकतांत्रित तरीके से देश की सरकार के दरवाजे पर पहुंचा है। सरकार को तुरंत किसानों से बातचीत करके उनकी समस्याओं का हल करना चाहिए। सरकार को चाहिए कि एमएसपी सुनिश्चित करने के लिए प्रावधान किया जाए।

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