Up Kiran, Digital Desk: रामलला की नगरी एक बार फिर पूरे देश की आँखों का तारा बनने वाली है। श्री राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में पहुँच गया है और इसका सबसे पवित्र प्रतीक यानी मुख्य शिखर पर धर्म ध्वज फहराने की तैयारी जोरों पर है। 25 नवंबर को खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ऐतिहासिक ध्वज को फहराएंगे। गुजरात के अहमदाबाद में हाथों से तैयार किया गया यह विशाल ध्वज राम मंदिर को जीवंत और जागृत घोषित करने वाला अंतिम संस्कार होगा।
ध्वज फहराना यानी मंदिर का पूर्ण जागरण
हिंदू मंदिर परंपरा में ध्वजारोहण कोई साधारण औपचारिकता नहीं है। जब तक शिखर पर ध्वज नहीं लहराता तब तक मंदिर को पूरी तरह सक्रिय और दैवीय शक्ति से संपन्न नहीं माना जाता। शास्त्र कहते हैं कि ध्वज फहरते ही देवता उस स्थान पर पूर्ण रूप से विराजमान हो जाते हैं और वह जगह साक्षात जागृत तीर्थ बन जाती है। राम मंदिर में यह ध्वज मुख्य गर्भगृह के ठीक ऊपर लगने जा रहा है। इसका मतलब साफ है कि अब रामलला का धाम हर दिशा से भक्तों के लिए पूरी तरह खुल जाएगा।
केसरिया रंग में डूबा राम का परचम
यह ध्वज गहरे केसरिया रंग का है। वही रंग जो सदियों से संतों की चादर रहा, रामभक्तों की यात्रा का साथी रहा और बलिदान की लपटों में हमेशा जलता रहा। ध्वज पर इक्ष्वाकु वंश का चिह्न, रघुकुल की शान, कोविदार का पवित्र वृक्ष और सूर्यवंशी राजचिह्न उकेरे गए हैं। बीच में बड़ा सा ॐ और भगवान सूर्य की आकृति श्रीराम की सूर्यवंशी विरासत को याद दिलाती है। देखते ही मन में एक साथ गर्व और श्रद्धा का भाव उमड़ आता है।
इतना बड़ा ध्वज कि दूर से ही नजर आएगा
आकार की बात करें तो यह ध्वज 22 फीट लंबा और 11 फीट चौड़ा है। इसे 42 फीट ऊंचे ध्वजदंड पर फहराया जाएगा जो 360 डिग्री घूम सकता है। कुल मिलाकर ध्वज करीब 200 फीट की ऊंचाई पर लहराएगा। इसके लिए खास पुली सिस्टम लगाया गया है। मोटी रस्सियाँ और इलेक्ट्रिक मोटर की मदद से इसे ऊपर चढ़ाया जाएगा। सबसे अच्छी बात यह है कि पूरी रिहर्सल पहले ही हो चुकी है। कोई जोखिम नहीं रहने दिया गया।
अहमदाबाद के कारीगर का दिल से बना परचम
इस ध्वज को तैयार किया है गुजरात के अहमदाबाद के कश्यप मेवाड़ा ने। उनके शब्दों में “यह तीन परतों वाले विशेष कपड़े से बना है। पूरी तरह देसी सामान और हाथ का काम। बनाने में पूरे पच्चीस दिन लगे। जब पता चला कि यह राम मंदिर के लिए जा रहा है तो रात दिन एक कर दिए। हमारे पूरे समाज और गुजरात के लिए यह बहुत बड़ा सम्मान की बात है।”
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