आम बजट 2021-22 : सार्वजनिक संपत्तियों के विनिवेश पर होगा सरकार का जोर!

भारत का आम बजट 2021 विपरीत हालातों में एक फ़रवरी को पेश किया जाएगा। वैश्विक कोरोना महामारी के दौर में केंद्र सरकार का स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च में काफी इजाफा हुआ है।

भारत का आम बजट 2021 विपरीत हालातों में एक फ़रवरी को पेश किया जाएगा। वैश्विक कोरोना महामारी के दौर में केंद्र सरकार का स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च में काफी इजाफा हुआ है। इस समय वैक्सीन लगाने का काम भी जोर-शोर से चल रहा है। ऐसे में सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पडेगा। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि धन जुटाने के लिए केंद्र सरकार आगामी बजट में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक संपत्तियों का विनिवेश कर सकती है।

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विनिवेश का लक्ष्य 2.1 लाख करोड़ रुपये रखा

बताते चलें कि विनिवेश एक प्रक्रिया है, जिसमें सरकार अपने नियंत्रण वाली सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों की संपत्ति बेचकर धन जुटाती है। यह काम सरकार अपने खर्च के लिए और आय व व्यय के बीच अंतर को कम करने के लिए करती है। पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने विनिवेश के जरिये 1.05 लाख करोड़ रुपये की रकम जुटाने का जुटाने का लक्ष्य रखा था। हालांकि सरकार यह लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी। इस साल सरकार ने विनिवेश का लक्ष्य 2.1 लाख करोड़ रुपये रखा है।

विनिवेश की योजना पर तेजी से आगे कदम बढ़ा रही

उल्लेखनीय है कि आय व व्यय के बीच अंतर को कम करने के लिए चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार रणनीतिक रूप से विनिवेश की योजना पर तेजी से आगे कदम बढ़ा रही है। सरकार कई पीएसयू कंपनियों में पब्लिक ऑफर लेकर आई है। आर्थिक विशेषज्ञों को उम्मीद है कि सरकार की विनिवेश आगामी वित्तीय वर्ष में भी जारी रहेगी। धन जुटाने के लिए सरकार के पास अन्य कोई विकल्प भी नहीं है।

फिलहाल केंद्र सरकार सार्वजनिक संपत्तियों की बिक्री के लिए जो योजना बना रही है उसमें न्यू पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज पॉलिसी भी शामिल है। सरकार की यह पॉलिसी आगामी वित्त वर्ष में विनिवेश पॉलिसी के लिए के लिए मार्गदर्शक साबित हो सकती है। हालांकि केंद्र सरकार की इस योजना की आलोचना हो रही है।

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