UP Kiran,Digital Desk: संसद के बजट सत्र में दोनों सदनों में जारी हंगामे से देश की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। मंगलवार को लोकसभा में जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, हंगामा शुरू हो गया, और कुछ ही समय बाद सदन को 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा। दूसरी ओर, राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने का मौका न मिलने पर विरोध जताया और वॉकआउट कर दिया। इस बीच, जनता और आम आदमी पार्टी के बीच की बढ़ती चिंता भी नजर आ रही है कि क्या यह गतिरोध शीघ्र समाप्त होगा?
कांग्रेस और विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप
लोकसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्षी सदस्य, खासकर कांग्रेस के सांसद, बार-बार अपने मुद्दे उठाने की कोशिश करते रहे, लेकिन पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने बार-बार कहा कि यह समय केवल बजट पर चर्चा के लिए निर्धारित है। वहीं, कांग्रेस के कई सदस्य राहुल गांधी को बोलने का मौका देने की मांग को लेकर अपनी सीटों से खड़े हो गए। उनके हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी। विपक्षी दलों के नेताओं का आरोप है कि सरकार उनकी आवाज़ दबाने की कोशिश कर रही है, जिससे लोकतंत्र में उनका अधिकार प्रभावित हो रहा है।
प्रश्नकाल में हंगामा: आम जनता का क्या होगा?
इससे पहले, संसद में अध्यक्ष ओम बिरला ने भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम को विश्व कप जीतने पर बधाई दी, लेकिन यह शांति ज्यादा देर नहीं टिक पाई। जैसे ही प्रश्नकाल की शुरुआत हुई, विपक्षी सदस्य अपनी आवाज़ उठाने के लिए खड़े हो गए और शोर मचाने लगे। विपक्ष के इन सांसदों ने सरकार पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने आम जनता को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या संसद में वास्तविक मुद्दों पर चर्चा हो रही है, या फिर राजनीतिक संघर्ष के बीच आम आदमी की आवाज़ कहीं गुम हो रही है।




