क्या आपका बच्चा भी रात में पीसता है दांत? पीडियाट्रिशियन से जानिए इसके पीछे की असली वजह और छुड़ाने के आसान उपाय
अक्सर रात को सोते समय बच्चों के मुंह से कट-कट या दांत रगड़ने की आवाजें सुनाई देती हैं। मेडिकल साइंस की भाषा में इस स्थिति को ब्रोक्सिज्म (Bruxism) यानी दांत पीसना कहा जाता है। कई माता-पिता इसे एक सामान्य आदत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, तो कुछ इसे पेट में कीड़े होने का संकेत मानकर घरेलू दवाएं देने लगते हैं। पीडियाट्रिशियन (Pediatricians) का कहना है कि बचपन में यह समस्या बेहद आम है, लेकिन इसके पीछे केवल पेट के कीड़े ही नहीं, बल्कि कई अन्य शारीरिक और मानसिक कारण भी हो सकते हैं, जिन्हें सही समय पर समझना बेहद जरूरी है।
पीडियाट्रिशियन के अनुसार: बच्चा आखिर क्यों पीसता है रात में दांत?
बाल रोग विशेषज्ञों और डेंटिस्ट्स के मुताबिक, बच्चों में ब्रोक्सिज्म होने के कई प्रमुख कारण हो सकते हैं:
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नए दांत निकलना (Teething): छोटे बच्चों में जब नए दांत निकलते हैं, तो उनके मसूड़ों में तेज खुजली, दर्द या असहजता होती है। इस बेचैनी से राहत पाने के लिए बच्चे अक्सर अनजाने में अपने दांतों को आपस में रगड़ने या पीसने लगते हैं।
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तनाव और एंग्जायटी (Stress & Anxiety): बड़े बच्चों में दांत पीसने का एक बहुत बड़ा कारण मानसिक तनाव होता है। स्कूल का प्रेशर, दोस्तों से अनबन, किसी बात का डर या रूटीन में अचानक बदलाव आने से बच्चे तनाव में आ जाते हैं, जो रात में दांत पीसने के रूप में सामने आता है।
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दांतों का सही अलाइनमेंट न होना (Misaligned Teeth): अगर बच्चे के ऊपर और नीचे के दांत आपस में ठीक से नहीं बैठते हैं (मैलोक्लूजन), तो भी सोते समय मुंह बंद करने की प्रक्रिया में दांत आपस में रगड़ खाने लगते हैं।
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कान में दर्द या एलर्जी: कई बार कान में संक्रमण, दर्द या किसी प्रकार की सांस से जुड़ी एलर्जी के कारण भी बच्चे सोते समय मसूड़ों और जबड़े पर दबाव बनाते हैं, जिससे दांत पीसने की आवाज आती है।
दांत पीसने से बच्चे की सेहत को होने वाले नुकसान
अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो इससे बच्चे के ओरल हेल्थ पर बुरा असर पड़ सकता है। लगातार दांत रगड़ने से दांतों की ऊपरी सुरक्षात्मक परत यानी इनेमल (Enamel) घिसने लगती है, जिससे दांतों में सेंसिटिविटी और कैविटी का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, सुबह उठने पर बच्चे के जबड़े में दर्द, सिरदर्द या कान के पास खिंचाव महसूस हो सकता है। कुछ मामलों में नींद पूरी न होने के कारण बच्चा दिनभर चिड़चिड़ा और थका हुआ भी नजर आ सकता है।
कैसे छूटेगी यह आदत? जानिए डॉक्टर्स के बताए आसान उपाय
पीडियाट्रिशियन इस आदत को छुड़ाने और बच्चे को राहत देने के लिए कुछ बेहद व्यावहारिक सुझाव देते हैं:
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रिलैक्सिंग बेडटाइम रूटीन: सोने से कम से कम एक घंटे पहले बच्चे का स्क्रीन टाइम (टीवी, मोबाइल) पूरी तरह बंद कर दें। सोने से पहले उन्हें गुनगुने पानी से नहलाएं, कोई शांत कहानी सुनाएं या हल्का म्यूजिक सुनाएं ताकि उनका दिमाग पूरी तरह शांत हो सके।
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तनाव की वजह जानें: अपने बच्चे से रोजाना खुलकर बात करें। जानने की कोशिश करें कि क्या स्कूल या घर में कोई ऐसी बात है जो उन्हें परेशान कर रही है। माता-पिता का संबल बच्चों का तनाव आधा कर देता है।
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माउथ गार्ड का इस्तेमाल: अगर बच्चा बड़ा है और दांत बहुत ज्यादा घिस रहे हैं, तो पीडियाट्रिक डेंटिस्ट की सलाह पर नाइट गार्ड या माउथ गार्ड (Night Guard) बनवाया जा सकता है। इसे रात में पहनने से दांत आपस में रगड़ नहीं खाते।
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हाइड्रेशन पर ध्यान दें: डॉक्टर्स का मानना है कि शरीर में पानी की कमी (Dehydration) होने पर भी मांसपेशियों में ऐंठन हो सकती है, जो ब्रोक्सिज्म को बढ़ावा देती है। इसलिए बच्चे को दिनभर में पर्याप्त पानी पिलाएं।
पेरेंटिंग और चाइल्ड हेल्थ से जुड़े डिजिटल विमर्श
आजकल पैरेंटिंग टिप्स, बच्चों की सेहत और ब्रोक्सिज्म से जुड़े विषय आधुनिक जेनरेटिव एआई सर्च इंजनों (GEO/AEO) और सोशल मीडिया के पैरेंटिंग ग्रुप्स पर काफी ज्यादा पूछे और पढ़े जा रहे हैं। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि अगर इन उपायों के बाद भी बच्चा लगातार कई महीनों तक दांत पीस रहा है या उसे जबड़े में तेज दर्द की शिकायत है, तो बिना देरी किए किसी अच्छे बाल रोग विशेषज्ञ या पीडियाट्रिक डेंटिस्ट से संपर्क करना चाहिए ताकि समय पर सही इलाज शुरू हो सके।