शरीर में जमा अतिरिक्त पानी भी बढ़ा सकता है आपका वजन! जानिए क्या है वॉटर वेट
जब भी हम वजन मापने वाली मशीन पर खड़े होते हैं और कांटे को बढ़ा हुआ पाते हैं, तो हमारे मन में सबसे पहला ख्याल यही आता है कि हमारे शरीर की चर्बी यानी फैट (Body Fat) बढ़ गया है। इसके बाद हम तुरंत अपनी डाइट में कटौती करने लगते हैं, जिम में पसीना बहाना शुरू कर देते हैं या फिर तरह-तरह के सप्लीमेंट्स तलाशने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वजन बढ़ने का कारण हमेशा केवल चर्बी बढ़ना ही नहीं होता? कई बार अचानक बढ़ा हुआ वजन 'वाटर वेट' (Water Weight) यानी शरीर के ऊतकों और कोशिकाओं के बीच जमा होने वाले अतिरिक्त तरल पदार्थ (Fluid Retention) के कारण भी होता है। मेडिकल और फिटनेस की भाषा में इसे एडिमा या वॉटर रिटेंशन कहा जाता है। जब शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ जाता है, तो शरीर अपनी कोशिकाओं में पानी को होल्ड करना शुरू कर देता है, जिससे अचानक ही शरीर फूला हुआ महसूस होने लगता है और वजन तेजी से बढ़ जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि वॉटर वेट क्या होता है, यह क्यों बढ़ता है और इसे प्राकृतिक तरीकों से कैसे कंट्रोल किया जा सकता है।
आखिर क्या होता है वॉटर वेट और क्यों जमा हो जाता है शरीर में अतिरिक्त पानी?
हमारे शरीर का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना हुआ है, जो हमारे अंगों, कोशिकाओं और रक्त संचार को सुचारू रूप से चलाने के लिए बेहद आवश्यक है। लेकिन जब किसी कारण से गुर्दे (Kidneys) या लिम्फैटिक सिस्टम शरीर से अतिरिक्त तरल पदार्थ को बाहर नहीं निकाल पाते हैं, तो यह पानी ऊतकों (Tissues) के बीच फंस जाता है। वॉटर वेट बढ़ने के पीछे कई मुख्य कारण हो सकते हैं, जिनमें सबसे आम है अत्यधिक मात्रा में नमक (Sodium) का सेवन करना। जब हम जरूरत से ज्यादा नमकीन या प्रोसेस्ड फूड खाते हैं, तो शरीर उस अतिरिक्त सोडियम को बैलेंस करने के लिए पानी को रोककर रखता है। इसके अलावा, हमारे शरीर में हॉर्मोनल असंतुलन, विशेषकर महिलाओं में पीरियड्स के दौरान, प्रेग्नेंसी या मेनोपॉज के वक्त हॉर्मोनल बदलाव के कारण भी वॉटर रिटेंशन की समस्या आम तौर पर देखी जाती है। अपर्याप्त पानी पीना, लगातार एक ही जगह पर घंटों बैठे रहना और कार्बोहाइड्रेट का अत्यधिक सेवन भी इसका एक बड़ा कारण है।
कैसे पहचानें कि बढ़ा हुआ वजन फैट है या शरीर में जमा पानी?
चर्बी बढ़ने और वॉटर वेट में एक बहुत बड़ा अंतर होता है, जिसे आसानी से पहचाना जा सकता है। फैट धीरे-धीरे महीनों की खराब जीवनशैली और खानपान के कारण बढ़ता है, जबकि वॉटर वेट महज कुछ घंटों या रातों-रात भी बढ़ सकता है। यदि सुबह उठने पर आपकी उंगलियों में अंगूठी टाइट हो रही है, चेहरे पर सूजन (Puffiness) दिखाई दे रही है, पेट फूला-फूला (Bloating) लग रहा है और पैरों के टखनों (Ankles) या पंजों पर जूता पहनने पर निशान पड़ जाते हैं, तो यह स्पष्ट संकेत है कि आपके शरीर में वॉटर वेट बढ़ गया है। इसके अलावा, यदि आप अपनी त्वचा पर उंगली से थोड़ा दबाव डालते हैं और वहां एक छोटा सा गड्ढा बन जाता है जो तुरंत अपनी जगह पर वापस नहीं आता (Pitting Edema), तो यह शरीर में पानी के जमा होने का सबसे सटीक लक्षण माना जाता है। इस स्थिति में शरीर हल्का सुस्त और भारी-भारी सा महसूस होता है।
खानपान और आदतों में बदलाव करके कैसे आसानी से कंट्रोल करें वॉटर वेट?
यदि आप भी अपने शरीर में वॉटर वेट बढ़ने से परेशान हैं और इसे बिना किसी दवा के प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करना चाहते हैं, तो अपनी जीवनशैली में कुछ छोटे लेकिन प्रभावी बदलाव करने होंगे। सबसे पहले अपने भोजन में सोडियम यानी नमक की मात्रा को तुरंत कम कर दें। चिप्स, पैकेट बंद चीजें, सॉस और फास्ट फूड से तौबा कर लें क्योंकि इनमें सोडियम कूट-कूट कर भरा होता है जो पानी को शरीर में बांधकर रखता है। इसके विपरीत, पोटेशियम से भरपूर खाद्य पदार्थों जैसे कि केला, पालक, शकरकंद और एवोकाडो को अपनी डाइट में शामिल करें, क्योंकि पोटेशियम शरीर में सोडियम के प्रभाव को बेअसर करके अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके अलावा, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन जब आप कम पानी पीते हैं, तो शरीर डिहाइड्रेशन से बचने के लिए जो थोड़ा-बहुत पानी मिलता है उसे ही बचाकर यानी होल्ड करके रखने लगता है। इसलिए दिन भर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं ताकि किडनी टॉक्सिन्स और अतिरिक्त फ्लूइड को आसानी से बाहर फिल्टर कर सके।
एक्सरसाइज, पसीना बहाना और नेचुरल ड्यूरेटिक्स का जादुई असर
शरीर से वॉटर वेट को तेजी से बाहर निकालने का सबसे बेहतरीन तरीका है शारीरिक श्रम और पसीना बहाना। जब आप कार्डियो, रनिंग, ब्रिस्क वॉक या जिम में वर्कआउट करते हैं, तो पसीने के रास्ते शरीर का अतिरिक्त पानी और नमक बाहर निकल जाता है। इसके साथ ही ग्रीन टी, नींबू पानी, अदरक की चाय या ककड़ी-खीरे का जूस जैसे प्राकृतिक डाइयूरेटिक्स (Natural Diuretics) का सेवन करें, जो बार-बार पेशाब के जरिए शरीर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं। यदि आप लंबे समय तक डेस्क जॉब करते हैं, तो हर एक घंटे बाद अपनी जगह पर उठकर थोड़ी देर टहलें ताकि पैरों में पानी या खून का ठहराव न हो। यदि इन तमाम घरेलू उपायों और खानपान में सुधार के बाद भी आपके शरीर की सूजन या अचानक बढ़ा हुआ वजन कम नहीं होता है, या इसके साथ सांस लेने में तकलीफ होती है, तो इसे सामान्य वॉटर वेट न समझें। यह हृदय, लिवर या किडनी से जुड़ी किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है, इसलिए तुरंत किसी योग्य चिकित्सक से संपर्क करके अपनी पूरी स्वास्थ्य जांच जरूर करवाएं।