40 की उम्र के बाद शरीर में क्यों आने लगती है कमजोरी? जानें क्या है मसल मास और इसे बनाए रखना क्यों है जरूरी

40 की उम्र के बाद शरीर में क्यों आने लगती है कमजोरी? जानें क्या है मसल मास और इसे बनाए रखना क्यों है जरूरी

एक उम्र के बाद अक्सर लोग यह शिकायत करते हैं कि उनका शरीर पहले जैसा मजबूत नहीं रहा, सीढ़ियां चढ़ने में घुटने जवाब दे रहे हैं और थोड़ी सी मेहनत करने पर भी थकान हो जाती है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, 40 की उम्र पार करते ही मानव शरीर में एक साइलेंट बदलाव शुरू होता है, जिसे मसल मास (Muscle Mass) का घटना कहा जाता है। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह बुढ़ापे को समय से पहले बुलावा दे सकता है। आइए जानते हैं कि मसल मास क्या है, उम्र के साथ इसके घटने के पीछे का विज्ञान क्या है और इसे कैसे बचाया जा सकता है।

क्या होता है मसल मास (Muscle Mass)?

सरल शब्दों में कहें तो हमारे शरीर का कुल वजन दो मुख्य चीजों से मिलकर बनता है—फैट मास (वसा) और लीन मास (Lean Mass)। इस लीन मास का सबसे बड़ा हिस्सा हमारी मांसपेशियां यानी मसल मास होती हैं। इसमें कंकाल की मांसपेशियां (Skeletal Muscles), चिकनी मांसपेशियां और हृदय की मांसपेशियां शामिल हैं। यही मसल्स हमारे कंकाल को ढांचा देती हैं, हमें चलने-फिरने, वजन उठाने और दैनिक कार्य करने की शक्ति प्रदान करती हैं।

40 के बाद क्यों तेजी से घटती हैं मांसपेशियां?

वैज्ञानिक भाषा में उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों के कमजोर होने और घटने की इस प्रक्रिया को सार्कोपेनिया (Sarcopenia) कहा जाता है।

  • घटने की दर: रिसर्च बताती है कि 30 से 40 वर्ष की उम्र के बाद इंसानी शरीर हर दशक (10 साल) में लगभग 3% से 5% मसल मास खोने लगता है। 60 वर्ष की उम्र के बाद यह दर और भी ज्यादा भयावह हो जाती है।

  • हार्मोनल बदलाव: 40 की उम्र के बाद पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन और महिलाओं में एस्ट्रोजन व ग्रोथ हार्मोन का स्तर गिरने लगता है, जो मसल्स को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होते हैं।

  • कम सक्रिय जीवनशैली: उम्र बढ़ने के साथ लोग भारी सामान उठाना या शारीरिक मेहनत वाले काम कम कर देते हैं, जिससे 'यूज़ इट ऑर लूज़ इट' (इस्तेमाल करो या खो दो) के नियम के तहत मसल्स सिकुड़ने लगती हैं।

मसल मास का मजबूत होना क्यों जरूरी है?

मांसपेशियों का मजबूत होना सिर्फ बॉडीबिल्डिंग या लुक के लिए नहीं, बल्कि एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए अनिवार्य है:

  • मेटाबॉलिज्म और वजन नियंत्रण: मांसपेशियां एक्टिव टिश्यूज होती हैं। आपके शरीर में जितना अधिक मसल मास होगा, आपका मेटाबॉलिज्म उतना ही तेज होगा और आपका शरीर आराम करते समय भी अधिक कैलोरी बर्न करेगा, जिससे मोटापा दूर रहता है।

  • हड्डियों की सुरक्षा और संतुलन: मजबूत मसल्स हड्डियों और जोड़ों के लिए कवच का काम करती हैं। यह बुढ़ापे में गिरने, फ्रैक्चर होने और ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का खोखला होना) के खतरे को 50% तक कम कर देती हैं।

  • ब्लड शुगर कंट्रोल: मांसपेशियां हमारे शरीर में ग्लूकोज (सिंक) को सोखने का सबसे बड़ा काम करती हैं। मसल मास कम होने से टाइप-2 डायबिटीज (Diabetes) का खतरा सीधे तौर पर बढ़ जाता है।

सार्कोपेनिया का अलार्म: यदि आपको बिना वजह वजन घटने, हाथ की पकड़ (Grip) कमजोर होने या सामान्य वॉक के दौरान भी संतुलन बिगड़ने की समस्या हो रही है, तो यह आपके घटते मसल मास का शुरुआती संकेत हो सकता है।

घटते मसल मास को रोकने के 3 अचूक वैज्ञानिक उपाय

अगर आपकी उम्र 40 या इसके पार हो चुकी है, तो आप इन तीन बदलावों से अपनी मसल्स को दोबारा युवा बना सकते हैं:

  1. रेसिस्टेंस ट्रेनिंग (स्ट्रेंथ ट्रेनिंग): हफ्ते में कम से कम 3 दिन वेट ट्रेनिंग, डम्बल एक्सरसाइज, पुश-अप्स या रेजिस्टेंस बैंड का इस्तेमाल करें। केवल कार्डियो या वॉक करना मसल्स बचाने के लिए काफी नहीं है।

  2. प्रोटीन युक्त आहार: मसल्स के निर्माण के लिए प्रोटीन सबसे जरूरी ब्लॉक है। अपने डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह पर रोजाना अपने वजन प्रति किलोग्राम के हिसाब से 1 से 1.2 ग्राम प्रोटीन (जैसे- पनीर, दालें, अंडे, लीन मीट, सोयाबीन) जरूर लें।

  3. पर्याप्त नींद और हाइड्रेशन: मांसपेशियां तब विकसित होती हैं जब आप सो रहे होते हैं। 7-8 घंटे की गहरी नींद लें ताकि मसल्स रिपेयर हो सकें और दिनभर में पर्याप्त पानी पीएं।

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