तब्लीगी जमात में शामिल विदेशी नागरिकों की याचिका पर आज हुई सुनवाई, कोर्ट ने दिया ये निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल विदेशी नागरिकों की विदेश जाने की अनुमति देने की याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे अपने देश में वापस जाने के लिए केंद्र सरकार के नोडल अफसर के पास अपनी बात रखें

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर यूपी किरण। सुप्रीम कोर्ट ने तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल विदेशी नागरिकों की विदेश जाने की अनुमति देने की याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे अपने देश में वापस जाने के लिए केंद्र सरकार के नोडल अफसर के पास अपनी बात रखें।
जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली बेंच ने संबंधित नोडल अफसर को निर्देश दिया कि वे विदेशी नागरिकों के प्रतिवेदन पर चार दिनों में फैसला लें। कोर्ट ने कहा कि प्रतिवेदन पर फैसला लेने में एक हफ्ते से ज्यादा की देरी नहीं होनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान एएसजी केएम नटराज ने कहा दिल्ली पुलिस के डीसीपी जॉय तिर्की को नोडल अफसर के रूप में नाम सुझाया। उन्होंने कहा कि 8 विदेशी नागरिकों को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया है जिस फैसले को सेशंस कोर्ट में चुनौती दी गई है। तब कोर्ट ने कहा कि बरी किए गए विदेशी नागरिक नोडल अफसर को प्रतिवेदन देने के लिए स्वतंत्र हैं बशर्ते कि वे ट्रायल कोर्ट में अंडरटेकिंग दें।
कोर्ट ने पिछले 31 जुलाई को विदेशी नागरिकों को निर्देश दिया था कि वे केंद्र सरकार को हिरासत में लिए गए लोगों की जानकारी दें। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया था कि जो लोग अपने देश वापस लौटना चाहते हैं उनकी सूचना दें उसके बाद वे इस मामले की सुनवाई करेंगे।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील फुजैल अहमद अय्युबी ने याचिका में कहा था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय का ब्लैक लिस्ट करने का फैसला एकतरफा और मनमाना है। गृह मंत्रालय ने 2 अप्रैल को 960 विदेशी नागरिकों को ब्लैकलिस्ट करने का आदेश दिया जबकि 4 जून को 2500 विदेशी नागरिकों को ब्लैकलिस्ट किया गया । ब्लैकलिस्ट करने के पहले विदेशी नागरिकों का पक्ष भी नहीं सुना गया। गृह मंत्रालय का ये फैसला संविधान की धारा 21 का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया था कि गृह मंत्रालय के फैसले की वजह से ये नागरिक अपने देश वापस भी नहीं जा पा रहे हैं।

 

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