कोरोना के चलते किन-किन देशों में, अकाल की स्थिति, जाने…

संयुक्त राष्ट्र के एक शीर्ष मानवीय अधिकारी ने सुरक्षा परिषद को एक पत्र लिखकर सचेत किया है, कि कोरोना महामारी से उत्पन्न संकट से यमन, दक्षिण सूडान, पूर्वोत्तर नाइजीरिया और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में अकाल की स्थिति पैदा हो गई है।

लॉस एंजेल्स। संयुक्त राष्ट्र के एक शीर्ष मानवीय अधिकारी ने सुरक्षा परिषद को एक पत्र लिखकर सचेत किया है, कि कोरोना महामारी से उत्पन्न संकट से यमन, दक्षिण सूडान, पूर्वोत्तर नाइजीरिया और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में अकाल की स्थिति पैदा हो गई है। पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने एक बयान जारी कर कहा था कि उक्त चारों देशों सहित एशिया में बांग्लादेश देश, पश्चमी अफ़्रीका, लेटिन अमेरिका, मध्य एशिया सहित 25देशों में क़रीब तेरह करोड़ लोग कोरोना महामारी के कारण भूख के शिकार हैं।

वहीं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी पंद्रह सदस्यों के नाम लिखे पत्र में मानवीय मामलों के महासचिव मार्क लोवॉक ने कहा है कि कोविड-19 महामारी से इन क्षेत्रों में अकाल का खतरा “प्राकृतिक आपदाओं, आर्थिक झटके और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट” से भी तेज हो गया है।उन्होंने कहा है, ‘इससे लाखों महिलाओं, पुरुषों और बच्चों का जीवन खतरे में पड़ गया है।” ऐसे में “संघर्ष-प्रेरित अकाल और व्यापक खाद्य असुरक्षा का जोखिम” होने पर अपडेट की आवश्यकता होती है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने पहले कहा है कि सभी चार क्षेत्र पुराने सशस्त्र संघर्षों की वजह से खाद्य संकट की चपेट में हैं और मानवीय राहत प्रदाताओं की स्वतंत्र रूप से सहायता वितरित करने में असमर्थता है। लेकिन महामारी से पैदा हुई जटिलताओं ने अब उन्हें अकाल की स्थितियों के करीब धकेल दिया है।

बता दें कि बीते अप्रैल माह में विश्व खाद्य कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक, डेविड बेस्ले (संयुक्त राष्ट्र की भुखमरी विरोधी अभियान) ने सुरक्षा परिषद को चेतावनी दी थी कि कोरोना महामारी के बीच, “हम एक भूखमरी के कगार पर हैं।” जुलाई में, उनके कार्यक्रम ने 25 देशों की पहचान की थी, जो महामारी के कारण भूख के विनाशकारी स्तरों का सामना करने के लिए तैयार थे।

लोवॉक की आगामी अकाल की नई चेतावनी उन अलर्ट को प्रभावी ढंग से बढ़ाती है। भूख आपात स्थिति के आकलन के लिए एक निगरानी प्रणाली के तहत यह अकाल का पाँचवाँ चरण है।इसे  “भुखमरी, मृत्यु, विनाश और अत्यंत गंभीर तीव्र कुपोषण के स्तर” के रूप में पहचान की गई है।

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