बिहार में पुलों की 'सेहत' पर बड़ा खुलासा: 23 महासेतुओं की हालत बेहद गंभीर, 50 को तुरंत वेंटिलेटर (मरम्मत) की दरकार
बिहार में बुनियादी ढांचे और पुलों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली सरकारी रिपोर्ट सामने आई है। बिहार पुल निर्माण निगम और आईआईटी पटना (IIT Patna) के शीर्ष विशेषज्ञों द्वारा संयुक्त रूप से की गई राज्यव्यापी जांच में यह खुलासा हुआ है कि बिहार के 23 बड़े पुलों (ब्रिज) की स्थिति बेहद नाजुक और गंभीर बनी हुई है। इसके साथ ही, राज्य के 50 अन्य छोटे-बड़े पुल ऐसे पाए गए हैं जिन्हें यदि तुरंत मरम्मत (रिपेयरिंग) की संजीवनी नहीं मिली, तो वे कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। इस खतरे को देखते हुए बिहार के पथ निर्माण विभाग ने पूरी तरह से कमर कस ली है और युद्धस्तर पर सुदृढ़ीकरण का काम शुरू करने की तैयारी की जा रही है। हिन्दुस्तान ब्यूरो पटना के विशेष संवाददाता जयेश जेतावत की इस एक्सक्लूसिव और आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड रिपोर्ट में जानिए कि इस सेफ्टी ऑडिट में बिहार के कौन-कौन से जिले सबसे ज्यादा संवेदनशील पाए गए हैं।
विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद नींद से जागा विभाग, आईआईटी पटना के विशेषज्ञों ने किया 'लाइफलाइन' पुलों का एक्सरे
पिछले महीने भागलपुर में गंगा नदी पर बने अत्यंत महत्वपूर्ण 'विक्रमशिला सेतु' का एक हिस्सा अचानक ध्वस्त होकर नदी में समा गया था। इस बड़े हादसे के बाद नीतीश सरकार और पथ निर्माण विभाग पर चौतरफा सवाल खड़े होने लगे थे। इसी विफलता से सबक लेते हुए बिहार सरकार ने आनन-फानन में राज्य भर के पुलों का व्यापक 'सेफ्टी ऑडिट' कराने का ऐतिहासिक फैसला लिया। विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने राज्य के अत्यंत महत्वपूर्ण और लाइफलाइन माने जाने वाले 250 मीटर से अधिक लंबाई वाले 47 विशाल पुलों की गहन तकनीकी जांच की जिम्मेदारी आईआईटी पटना के वैज्ञानिकों को सौंपी थी। आईआईटी की इस प्रारंभिक और विस्तृत रिपोर्ट के सामने आते ही अब सरकार के शीर्ष गलियारों में बैठकों का दौर शुरू हो गया है। पथ निर्माण सचिव ने वरीय अधिकारियों के साथ इस रिपोर्ट की एक उच्च स्तरीय समीक्षा की है और लापरवाह इंजीनियरों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
638 पुलों का हुआ सबसे बड़ा सेफ्टी ऑडिट, पश्चिम चंपारण, मुजफ्फरपुर और अररिया में सबसे ज्यादा कमजोर पुल
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस विशेष अभियान के तहत पूरे बिहार में 60 मीटर से अधिक लंबाई वाले कुल 638 पुलों को चिह्नित किया गया था, जिनकी शत-प्रतिशत शारीरिक और तकनीकी जांच पूरी कर ली गई है। पुल निर्माण निगम की समीक्षा में पाया गया कि कई जिलों में नदियों पर बने पुल अपनी मियाद पूरी कर चुके हैं या रखरखाव के अभाव में खोखले हो रहे हैं। जांच के दौरान जिन 638 पुलों का बारीकी से निरीक्षण किया गया, उनका जिलावार विवरण कुछ इस प्रकार है:
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पश्चिम चंपारण: 49 पुल
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मुजफ्फरपुर: 39 पुल
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अररिया: 38 पुल
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किशनगंज: 37 पुल
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पटना और कटिहार: 36-36 पुल
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सुपौल: 35 पुल
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पूर्वी चंपारण: 30 पुल
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दरभंगा: 29 पुल
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पूर्णिया: 27 पुल
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गयाजी (गया): 25 पुल
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नवादा: 20 पुल
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सहरसा: 19 पुल
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जमुई: 16 पुल
"लापरवाही से पुल टूटा तो खैर नहीं!" सचिव पंकज कुमार पाल की इंजीनियरों और अफसरों को दोटूक चेतावनी
समीक्षा बैठक के दौरान पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल का कड़ा रुख देखने को मिला। उन्होंने संबंधित क्षेत्रों के मुख्य अभियंताओं (इंजीनियर्स) और जिम्मेदार अफसरों को सख्त लहजे में चेतावनी जारी की है। सचिव ने साफ कहा कि अगर भविष्य में किसी भी इंजीनियर की थोड़ी सी भी लापरवाही या खराब मॉनिटरिंग के कारण कोई पुल क्षतिग्रस्त होता है या टूटता है, तो केवल सस्पेंशन नहीं बल्कि उनके खिलाफ कठोरतम दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार अब इस मामले में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। हालांकि, इस बीच विभागीय मंत्रियों का दावा है कि विक्रमशिला सेतु के एक्सपेंशन ज्वाइंट से फिलहाल यातायात को कोई तात्कालिक खतरा नहीं है, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।