मासिक शिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग; मिट्टी से शिवलिंग बनाकर करें ये एक अचूक उपाय
सनातन धर्म में शिव साधना के लिए शिवरात्रि का दिन बेहद पवित्र और फलदायी माना गया है। आज शनिवार को अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के 28वें दिन एक बेहद दुर्लभ और पवित्र संयोग बन रहा है, जिसे शास्त्रों में मासिक शिवरात्रि के रूप में बेहद खास माना गया है। आज के दिन की महिमा इसलिए और अधिक बढ़ गई है क्योंकि इस पावन तिथि पर 'सर्वार्थ सिद्धि योग' और 'अमृत सिद्धि योग' का महासंयोग एक साथ विद्यमान है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस महासंयोग के दौरान पवित्र मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग बनाकर श्रद्धापूर्वक आराधना करने से साधक की हर अधूरी और मनचाही मुराद पूरी हो सकती है। लाइव हिन्दुस्तान की धर्म-अध्यात्म विशेषज्ञ सृष्टि चौबे की इस विशेष एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड रिपोर्ट में जानिए आज शाम की पूजा का सटीक मुहूर्त, पार्थिव शिवलिंग बनाने की विधि और एक बेहद चमत्कारी उपाय।
आज शाम गोधूलि बेला में बन रहा है पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त, नोट करें समय
आज अधिक मास की इस मासिक शिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए संध्या काल यानी प्रदोष काल की पूजा का विशेष महत्व है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, आज शाम को पूजा के लिए सबसे पवित्र और कल्याणकारी 'गोधूलि मुहूर्त' शाम 07:18 बजे से शुरू होकर शाम 07:39 बजे तक रहेगा। इस मात्र 21 मिनट की दिव्य अवधि में की गई शिव आराधना और मंत्र जाप जीवन के सभी संकटों को दूर कर सुख-समृद्धि प्रदान करने वाले माने गए हैं।
घर पर इस विधि से तैयार करें चमत्कारी 'पार्थिव शिवलिंग', दिशा का रखें खास ख्याल
शास्त्रों में मिट्टी से बने शिवलिंग यानी पार्थिव शिवलिंग की पूजा को कलयुग में सबसे उत्तम और तत्काल फल देने वाला बताया गया है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले किसी पवित्र स्थान या बगीचे से साफ मिट्टी इकट्ठा कर लें। इस मिट्टी को शुद्ध करने के लिए इसमें थोड़ा सा गाय का शुद्ध घी, गंगाजल या साफ पानी मिलाएं। इसके बाद पूरी श्रद्धा के साथ मिट्टी को शिवलिंग और जलाधारी का सुंदर आकार दें। पूजा करते समय ध्यान रखें कि निर्मित पार्थिव शिवलिंग की स्थापना हमेशा उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए और पूजा करने वाले व्यक्ति का मुख पूर्व दिशा की तरफ होना अनिवार्य है।
गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक कर ऐसे करें महादेव की संपूर्ण पूजा
शिवरात्रि की संध्या को स्नान आदि से निवृत्त होकर सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी का ध्यान करें। इसके बाद माता पार्वती, नवग्रहों और भोलेनाथ का स्मरण करते हुए रुद्राभिषेक का संकल्प लें। पूजा की शुरुआत शिवलिंग पर पवित्र गंगाजल अर्पित करके करें। इसके बाद आप अपनी मनोकामना के अनुसार कच्चे दूध, दही, शहद, गन्ने के रस अथवा पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें। अभिषेक के बाद महादेव को प्रिय बेलपत्र, सफेद चंदन, अक्षत (बिना टूटे चावल), काला तिल, भांग, धतूरा, मदार (आंक), शमी के पत्र, कनेर के पुष्प, कलावा, फल और सफेद रंग की मिठाई का भोग लगाएं। अंत में पूरे शिव परिवार की आरती कर भूलचूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
अनामिका उंगली से बेलपत्र पर लिखें यह मंत्र, बड़े से बड़ा संकट टलने का है दावा
आज इस विशेष संयोग पर अपनी गुप्त मनोकामना को पूरा करने के लिए शास्त्रों में एक बेहद चमत्कारी उपाय बताया गया है। आज शाम की पूजा के दौरान एक साफ और बिना कटा-फटा बेलपत्र लें। अपनी दाहिने हाथ की अनामिका उंगली (Ring Finger) से लाल चंदन का लेप बनाकर बेलपत्र के तीनों पत्तों पर 'ॐ नमः शिवाय' लिखें। इसके बाद इस बेलपत्र को शिवलिंग पर अर्पित करते हुए मन ही मन महादेव के सामने अपनी इच्छा या परेशानी को दोहराएं। माना जाता है कि अधिक मास की शिवरात्रि पर किया गया यह उपाय सोई हुई किस्मत को भी जगा देता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): इस आलेख में दी गई जानकारियां लोक मान्यताओं, धार्मिक ग्रंथों और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित हैं। लाइव हिन्दुस्तान इस जानकारी की पूर्ण सत्यता और सटीकता का दावा नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित क्षेत्र के योग्य विशेषज्ञ या ज्योतिषाचार्य की सलाह अवश्य लें।