बंगाल का सियासी भूचाल: क्या फिर कांग्रेसी बनेंगी ममता बनर्जी, शुभंकर सरकार का 'राहुल गांधी' वाला बड़ा ऑफर
पश्चिम बंगाल की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली राजनीतिक खबर सामने आ रही है। हाल ही में संपन्न हुए बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को मिली करारी शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर ऐसा महाभूकंप आया है जिसने पूरे देश की राजनीति को हिलाकर रख दिया है। एक तरफ जहां टीएमसी ताश के पत्तों की तरह बिखर रही है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी की अपनी पुरानी और मूल पार्टी 'कांग्रेस' में घर वापसी की अटकलों ने जबरदस्त जोर पकड़ लिया है। इस बीच, पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने ममता बनर्जी के सामने एक बेहद दिलचस्प और बड़ा सियासी ऑफर रख दिया है, जिसने कयासों के बाजार को और गर्म कर दिया है।
'जो राहुल गांधी को PM देखना चाहता है, उसके लिए दरवाजे खुले हैं'
कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने एक बड़ा और नीतिगत बयान दिया। जब पत्रकारों ने उनसे सीधा सवाल किया कि क्या कांग्रेस अपनी धुर विरोधी रही ममता बनर्जी को दोबारा पार्टी में शामिल करने के लिए तैयार है? तो शुभंकर सरकार ने बेहद सधे हुए अंदाज में जवाब देते हुए कहा, "राजनीति संभावनाओं की कला है। जो भी व्यक्ति देश के हित में और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भारत का अगला प्रधानमंत्री बनते देखना चाहता है, उस हर एक नेता के लिए कांग्रेस पार्टी के दरवाजे हमेशा खुले हैं।" जब उनसे आगे पूछा गया कि क्या यही शर्त ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर भी लागू होगी? तो प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट कर दिया कि अभिषेक बनर्जी की एंट्री के लिए भी यही एकमात्र पैमाना होगा।
सोनिया और राहुल गांधी के साथ गुप्त बैठकों से बढ़ी सरगर्मी, 28 साल पुराना इतिहास दोहराने की तैयारी!
बीते दो दिनों के भीतर देश की राजधानी दिल्ली में जो सियासी घटनाक्रम हुआ है, उसने इन कयासों को ठोस आधार दिया है। दरअसल, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ कई राउंड की गोपनीय बैठकें की हैं। राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि टीएमसी का अस्तित्व बचाने के लिए ममता बनर्जी अपनी मूल पार्टी की तरफ लौट सकती हैं। आपको बता दें कि ममता बनर्जी ने साल 1998 में कांग्रेस आलाकमान से मतभेदों के बाद पार्टी से अलग होकर अपनी नई पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का गठन किया था। इसके बाद साल 2011 में उन्होंने वाममोर्चा के 34 साल पुराने अभेद्य किले को ढहाकर सत्ता हासिल की थी और 2026 तक यानी पूरे 15 साल बंगाल पर राज किया। हालांकि, कांग्रेस का एक धड़ा ममता की वापसी का अंदरूनी विरोध भी कर रहा है, क्योंकि अतीत में टीएमसी ने कांग्रेस की कई नगरपालिकाओं और विधायकों को अपने पाले में कर लिया था।
'असली तृणमूल हम हैं, कांग्रेस में नहीं होगा विलय' – बागी गुट के नेता रितब्रत बनर्जी की खुली चुनौती
एक तरफ जहां शीर्ष नेतृत्व कांग्रेस के साथ पींगे बढ़ा रहा है, वहीं बंगाल में टीएमसी के भीतर इतिहास की सबसे बड़ी बगावत हो चुकी है। विधानसभा चुनाव में मिली हार के महज एक महीने के भीतर ही पार्टी के दो-तिहाई से अधिक विधायक और सांसद बागी हो चुके हैं। लोकसभा में टीएमसी के करीब 20 सांसदों ने ममता बनर्जी से नाता तोड़कर एक अलग गुट बना लिया है और वे केंद्र की बीजेपी नीत एनडीए (NDA) सरकार को समर्थन देने का मन बना चुके हैं। इधर, राज्य विधानसभा में बागी विधायकों ने एकजुट होकर रितब्रत बनर्जी को अपना नया नेता (विपक्ष का नेता) चुन लिया है। रितब्रत बनर्जी ने विधानसभा परिसर के बाहर मीडिया के सामने कड़क लहजे में एलान किया, "हमारा कांग्रेस में विलय करने का कोई इरादा नहीं है। हम ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं और हम अपनी अलग पहचान बनाए रखेंगे।"
80 में से 64 विधायक ममता का साथ छोड़ने को तैयार, राज्यसभा में भी ताश के पत्तों की तरह ढही पार्टी
उलुबेरिया पूर्व सीट से कद्दावर विधायक रितब्रत बनर्जी ने एक बेहद सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि 2026 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी के सिंबल पर महज 80 उम्मीदवार ही जीतकर विधायक बन पाए थे, जिनमें से 64 बागी विधायक इस वक्त उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ने वाली है, जिसके बाद ममता बनर्जी के पास बमुश्किल 15 विधायक ही शेष बचेंगे। रितब्रत ने आगे कहा कि न तो पार्टी के दो-तिहाई सांसद कांग्रेस में जा रहे हैं और न ही जमीनी स्तर पर जिला परिषद या नगरपालिकाओं के सदस्य। इस राजनीतिक टूट का सीधा असर देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा में भी देखने को मिला है, जहां बुधवार को वरिष्ठ सांसद सुष्मिता देव ने अपनी राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले सोमवार को दिग्गज नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने भी पार्टी से बगावत करते हुए राज्यसभा छोड़ दी थी, जिसके बाद उच्च सदन में टीएमसी की ताकत घटकर सिर्फ 11 सांसदों की रह गई है।