4 नेताओं पर 1 करोड़ का इनाम और देशद्रोह का केस, 100 से ज्यादा की मौत के बाद चीख-पुकार
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इस समय हालात पूरी तरह से बेकाबू हो चुके हैं और पूरा क्षेत्र बारूद के ढेर पर बैठ गया है। नागरिक अधिकारों के लिए लड़ रहे स्थानीय संगठन 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) द्वारा बुलाए गए महा-आंदोलन और मुजफ्फराबाद मार्च को कुचलने के लिए पाकिस्तानी हुकूमत ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं। प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए सेना और दंगा रोधी पुलिस की बर्बर कार्रवाई में अब तक 100 से अधिक स्थानीय नागरिकों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 400 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। हालात को दबाने के लिए पूरे पीओके में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह से ठप कर दी गई हैं। इसी बीच प्रशासन ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे JAAC के 4 शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी पर एक-एक करोड़ रुपये का भारी-भरकम इनाम (हेड मनी) घोषित कर दिया है, जिससे कश्मीरी जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
मीरपुर से मुजफ्फराबाद मार्च के दौरान भारी हिंसा, अपनी ही छत पर खड़े डॉक्टर को लगी सरकारी गोली
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मीरपुर विजन के अंतर्गत आने वाले मीरपुर, भिंबर और कोटली जिलों से हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने जब मुजफ्फराबाद की ओर अपनी ऐतिहासिक मार्च शुरू की, तो पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने के लिए अंधाधुंध बल प्रयोग किया। सबसे हिंसक और रोंगटे खड़े कर देने वाली झड़पें कोटली शहर में देखने को मिलीं। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और पीओके कैबिनेट के सदस्यों के मुताबिक, यहां पुलिस की तरफ से की गई सीधी फायरिंग में एक स्थानीय डॉक्टर और एक महिला समेत कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि उक्त डॉक्टर अपने घर की छत पर खड़े होकर नीचे सड़क का मंजर देख रहे थे, तभी सुरक्षा बलों की एक गोली उनके आर-पार हो गई। इस गोलीबारी के जवाब में भड़के प्रदर्शनकारियों के हमले में कई पुलिसकर्मी भी लहूलुहान हुए हैं।
शौकत नवाज मीर समेत 4 कश्मीरी नेताओं पर देशद्रोह का मुकदमा, 1-1 करोड़ की 'हेड मनी' जारी
पीओके के गृह विभाग ने आंदोलन की धार को कुचलने के लिए कानून का सहारा लेते हुए जेएएसी के मुख्य एजेंडा सेटर्स और नेताओं - शौकत नवाज मीर (मुजफ्फराबाद) और मेहरान अरशद ख्वाजा (मीरपुर) के खिलाफ देशद्रोह (Treason) की सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया है। इन नेताओं पर आरोप है कि वे अपने जोशीले भाषणों, ऑडियो और सोशल मीडिया वीडियो के जरिए कश्मीरी जनता को पाकिस्तान के खिलाफ भड़का रहे हैं। इसके साथ ही, सरकार ने आंदोलन का मुख्य चेहरा बने चार प्रमुख नेताओं - शौकत नवाज मीर, उमर नजीर कश्मीरी, ख्वाजा मेहरान अरशद और सरदार अमान खान को जिंदा या मुर्दा पकड़वाने के लिए एक-एक करोड़ पाकिस्तानी रुपये का सरकारी इनाम घोषित किया है। इस संगठन को पिछले हफ्ते ही पाकिस्तानी हुकूमत ने पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया था।
इंटरनेट ठप और मुजफ्फराबाद में वकीलों की हड़ताल, विदेशी कूटनीतिक साजिश का आरोप लगा 5 गिरफ्तार
पूरे पीओके में विरोध की आवाज को दुनिया के सामने आने से रोकने के लिए मोबाइल इंटरनेट और डिजिटल डेटा सेवाओं को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया है। मुजफ्फराबाद समेत तमाम छोटे-बड़े शहरों में पूर्ण तालाबंदी और हड़ताल का माहौल है। बैंक, कमर्शियल मार्केट, मेडिकल स्टोर और परिवहन सेवाएं पूरी तरह से बंद हैं। मुजफ्फराबाद की मुख्य सड़कों और सरकारी इमारतों पर भारी हथियारों से लैस दंगा रोधी पुलिस ने मोर्चा संभाल रखा है। इस बीच, कोर कमेटी के सदस्य और वरिष्ठ वकील अमजद अली खान की अवैध गिरफ्तारी के खिलाफ वकीलों ने भी अदालतों के न्यायिक कामकाज का पूर्ण बहिष्कार कर दिया है। दूसरी तरफ, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों ने विदेशी साजिश का दावा करते हुए मुजफ्फराबाद से 5 संदिग्धों को अरेस्ट किया है, जिनके पास से 7 ऑटोमैटिक हथियार, सैन्य उपकरण और हैंड ग्रेनेड बरामद होने का दावा किया गया है।
कठपुतली पीएम की बातचीत की खोखली अपील, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मानवाधिकार उल्लंघन पर जताई गहरी चिंता
पीओके के कठपुतली प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा करते हुए प्रदर्शनकारियों से बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है। उन्होंने लिखा कि खून-खराबे और सरकारी संपत्तियों को फूंकने के बजाय चर्चा से समाधान निकाला जाना चाहिए, क्योंकि लगातार हो रही धमकियों से घाटी का भला नहीं होगा। हालांकि, स्थानीय जनता इस अपील को ढोंग बता रही है। इस बीच, वैश्विक मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स कमिशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP) ने संयुक्त बयान जारी कर कश्मीरी नागरिकों पर हो रहे अत्याचार, अवैध गिरफ्तारियों और इंटरनेट शटडाउन पर बेहद गंभीर चिंता व्यक्त की है और पाकिस्तान सरकार से बल प्रयोग को तुरंत रोकने की मांग की है।
आखिर क्यों सुलग रहा है पूरा PoK? जानिए क्या है जनता के गुस्से की मुख्य वजह
पीओके में अचानक भड़के इस महा-बवाल की सबसे मुख्य और तात्कालिक वजह आगामी 27 जुलाई को होने वाले विधायी चुनाव हैं। इस चुनाव से ठीक पहले पाकिस्तानी हुकूमत ने 45 में से 12 विधानसभा सीटों को शरणार्थियों के लिए आरक्षित घोषित कर दिया है, जिसे स्थानीय कश्मीरी लोग अपनी राजनीतिक ताकत को कम करने और डेमोग्राफी बदलने की एक बड़ी साजिश मान रहे हैं। इसी फैसले के विरोध में नागरिक समाज के सबसे बड़े गठबंधन 'JAAC' ने सड़कों पर उतरने का आह्वान किया था। सीटों के इस विवाद के अलावा, स्थानीय लोगों में पाकिस्तान द्वारा उनके प्राकृतिक जल और बिजली संसाधनों के दोहन, भारी महंगाई, रिकॉर्ड तोड़ बेरोजगारी, भीषण बिजली संकट और दशकों से उन्हें राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेले जाने को लेकर गहरा आक्रोश है जो अब लावा बनकर फूट पड़ा है।
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