Up kiran,Digital Desk : ईरान में पिछले हफ्तों से जारी हिंसक प्रदर्शन और विरोध-प्रदर्शन लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सरकारी दमन और सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई के बावजूद कम से कम 5,000 प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं, जबकि हजारों को गिरफ्तार किया गया है।
देश में इंटरनेट और मीडिया पर पाबंदियों के बावजूद विरोध जारी है। सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह अली खामनेई और सरकार ने विदेशी ताकतों को इस हिंसा का जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, अमेरिका और अन्य देशों ने भी चिंता जताई है।
1. ईरानी राष्ट्रपति की अमेरिका को चेतावनी
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि यदि किसी भी तरह का हमला उनके सुप्रीम लीडर पर हुआ, तो इसे पूरे ईरान के खिलाफ युद्ध माना जाएगा। उन्होंने ट्विटर (एक्स) पर लिखा कि किसी अन्यायपूर्ण आक्रमण का जवाब ईरान कठोरता से देगा।
2. अमेरिका और इज़राइल पर आरोप
आयातुल्लाह खामनेई ने कहा कि इन दंगों और अशांति के लिए अमेरिकी और इजरायली एजेंसियों ने कुछ प्रदर्शनकारियों को प्रशिक्षित किया। उन्होंने चेताया कि ईरान किसी बाहरी दबाव या धमकी से नहीं डरेगा।
3. स्टेट टीवी हैक
ईरान के सरकारी टीवी चैनल को विरोधी समूह ने हैक कर लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारी फुटेज और संदेश प्रसारित किए गए। निर्वासित राजकुमार रेजा पहलवी का संदेश भी दिखाया गया, जिसमें लोगों से विरोध जारी रखने और सुरक्षा बलों से खड़े होने की अपील की गई।
4. रेजा पहलवी का समर्थन
निवासित राजकुमार रेजा पहलवी ने कहा कि यह संघर्ष अधिकार और मुक्ति के बीच है। उन्होंने घोषणा की कि वे जल्द ही ईरान लौटेंगे।
5. इंटरनेट सेवाओं में थोड़ी रियायत
8 जनवरी के बाद पूरे देश में इंटरनेट बंद कर दिया गया। हालांकि कुछ जगहों पर सीमित और heavily filtered इंटरनेट सेवा बहाल की गई है।
6. अमेरिका की प्रतिक्रिया
अमेरिका ने कहा कि सभी विकल्प खुले हैं और सैन्य कार्रवाई से इनकार नहीं किया गया। ट्रंप ने प्रदर्शन जारी रखने की अपील की, लेकिन बाद में उनका रुख बदल गया।
7. शांति लेकिन अस्थिरता
तेहरान और अन्य शहरों में सड़कें कभी शांत दिखती हैं, लेकिन अस्थिरता बनी हुई है। सुरक्षा बल व्यापक रूप से तैनात हैं।
8. ट्रंप की बदलती रणनीति
ट्रंप ने पहले ईरानियों से प्रदर्शन जारी रखने का आह्वान किया, लेकिन एक दिन बाद कहा कि ईरानी अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि किसी को फांसी नहीं दी जाएगी। इससे प्रदर्शनकारियों में डर और मायूसी बढ़ गई।
9. भारतीय छात्रों की रिपोर्ट
ईरान में फंसे भारतीय छात्रों ने हालात को बेहद तनावपूर्ण बताया। इंटरनेट ब्लैकआउट और हिंसक माहौल के कारण वे अलग-थलग महसूस कर रहे थे। लगभग 9,000 भारतीय नागरिक वहां हैं, जिनमें अधिकांश छात्र हैं।
10. विरोध का कारण और हिंसक होना
विरोध शुरू में आर्थिक मुश्किलों, महंगाई और बेरोजगारी के कारण था। लेकिन दो हफ्तों में यह राजनीतिक प्रदर्शन में बदल गया और हिंसक रूप लेने लगा।
_2047902952_100x75.png)
_922879018_100x75.png)
_2081908850_100x75.png)
_154499779_100x75.png)
_1150626513_100x75.png)