Up kiran,Digital Desk : गाजा को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति पहल के तहत बनाए गए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में इस्राइल शामिल होने जा रहा है। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस अंतरराष्ट्रीय मंच का हिस्सा बनने पर सहमति जता दी है। यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि कुछ समय पहले तक इस्राइल ने इस बोर्ड के गठन और इसके सदस्यों को लेकर खुलकर नाराजगी जताई थी। उस वक्त इस्राइली सरकार का कहना था कि बोर्ड ऑफ पीस के गठन से पहले उससे कोई सलाह नहीं ली गई और यह प्रस्ताव इस्राइल की नीतियों से मेल नहीं खाता। ऐसे में अब इस्राइल का रुख बदलना पश्चिम एशिया की राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा करता है।
पहले तीखा विरोध, अब बदला रुख
बोर्ड ऑफ पीस को लेकर इस्राइल में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही खेमों ने आलोचनात्मक रुख अपनाया था। अमेरिका की ओर से बोर्ड के सदस्यों की सूची सामने आने के बाद इस्राइल के सुरक्षा मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि गाजा को किसी प्रशासनिक समिति की नहीं, बल्कि हमास के आतंक से मुक्ति की जरूरत है। वहीं विपक्ष के नेता येर लापिड ने इसे इस्राइल की कूटनीतिक असफलता करार दिया था। ऐसे माहौल में नेतन्याहू का इस बोर्ड में शामिल होने पर सहमत होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
अमेरिका ने किया सदस्यों का एलान
शनिवार को अमेरिका ने बोर्ड ऑफ पीस के सदस्यों के नाम सार्वजनिक किए थे। इसमें तुर्किये के विदेश मंत्री, कतर सरकार के प्रतिनिधि, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर जैसे नाम शामिल हैं। इन नामों को लेकर ही इस्राइल ने पहले आपत्ति जताई थी, लेकिन अब उसकी भागीदारी से संकेत मिल रहा है कि गाजा के भविष्य को लेकर बातचीत के रास्ते खुले रहेंगे।
क्या है गाजा का बोर्ड ऑफ पीस
बोर्ड ऑफ पीस को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से गाजा में शांति स्थापित करने के लिए प्रस्तावित एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में पेश किया गया है। व्हाइट हाउस का दावा है कि इसका उद्देश्य इस्राइल और फलस्तीन के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाना है। यह बोर्ड ट्रंप की 20-सूत्रीय गाजा शांति योजना को लागू करने के लिए बनाया गया है, जिसमें संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में स्थिरता, कानूनी शासन की बहाली और स्थायी शांति पर जोर दिया गया है।
कैसा होगा बोर्ड ऑफ पीस का ढांचा
बोर्ड ऑफ पीस का ढांचा तीन स्तरों में तैयार किया गया है। सबसे ऊपर संस्थापक कार्यकारी परिषद होगी, जो गाजा में शांति की रणनीति तय करेगी। इसकी अध्यक्षता खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे और उनके पास निर्णयों पर वीटो का अधिकार होगा। इस परिषद में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, पश्चिम एशिया के लिए विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर, टोनी ब्लेयर और विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा जैसे नाम शामिल हैं।
क्षेत्रीय समन्वय की जिम्मेदारी कार्यकारी बोर्ड पर
दूसरे स्तर पर गाजा कार्यकारी बोर्ड होगा, जो जमीनी स्तर पर शासन और क्षेत्रीय समन्वय से जुड़े कार्य देखेगा। इसमें तुर्किये, कतर, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है, ताकि क्षेत्रीय संतुलन बना रहे।
स्थानीय प्रशासन के लिए अलग समिति
सबसे निचले स्तर पर गाजा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति बनाई गई है, जिसमें फलस्तीनी तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह समिति गाजा में स्वास्थ्य, शिक्षा और वित्त जैसी आवश्यक सेवाओं का संचालन करेगी।
इस्राइल की भागीदारी के साथ अब यह देखना अहम होगा कि क्या बोर्ड ऑफ पीस वास्तव में गाजा में स्थायी शांति की दिशा में कोई ठोस बदलाव ला पाता है या फिर यह पहल कूटनीतिक मतभेदों में उलझकर रह जाती है।
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