Up kiran,Digital Desk : इस्राइल ने वेस्ट बैंक में अपने नियंत्रण को और मजबूत करने और फलस्तीन की सीमित सत्ता को कमजोर करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। सुरक्षा कैबिनेट ने रविवार को वित्त मंत्री बेजल एल स्मोट्रिच के नेतृत्व में भूमि बिक्री, रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और संवेदनशील धार्मिक क्षेत्रों में निर्माण पर नियंत्रण बढ़ाने का फैसला लिया। कैबिनेट के अनुसार यह कदम फलस्तीनी राज्य की धारणा को कमजोर करने की दिशा में है।
फलस्तीन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने फैसले की आलोचना की
फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इस निर्णय को खतरनाक बताया और बसावटों को कानूनी रूप देने का प्रयास करार दिया। उन्होंने अमेरिका और यूएन सुरक्षा परिषद से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की। जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने भी इसे अवैध इस्राइली अधिकार थोपने और बसावटों को मजबूत करने का प्रयास बताया।
मुख्य फैसलों का सार
वेस्ट बैंक में यहूदी नागरिकों को फलस्तीनी जमीन खरीदने की रोक हटाई गई।
जमीन के रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएंगे ताकि बसावटें आसानी से बनाई जा सकें।
हिब्रोन जैसे धार्मिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण की योजना इस्राइली अधिकारियों को सौंपा गया।
पर्यावरण और पुरातात्विक मामलों में इस्राइल को हस्तक्षेप की अनुमति मिली।
एक विशेष समिति को पुनर्जीवित किया गया, जो इस्राइल को जमीन खरीदने की अनुमति देगी।
वेस्ट बैंक की भू-राजनीतिक स्थिति
वर्तमान में वेस्ट बैंक का 40 प्रतिशत हिस्सा फलस्तीन के नियंत्रण में है, जबकि शेष इस्राइल नियंत्रित है। फलस्तीनियों को निजी तौर पर यहूदी नागरिकों को जमीन बेचने की अनुमति नहीं है। वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में 7 लाख से अधिक यहूदी रहते हैं। 1967 में इस क्षेत्र पर इस्राइल ने कब्जा किया था, जबकि फलस्तीन इसे भविष्य के राज्य के लिए मांगते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन बसावटों को अवैध मानता है और शांति प्रयासों में बाधा समझता है।
पिछले फैसले और भविष्य की चुनौतियां
दिसंबर में इस्राइल की कैबिनेट ने वेस्ट बैंक में 19 नई यहूदी बसावटों को मंजूरी दी थी। जनवरी में यरुशलम के पास एक विवादित बसावट परियोजना के निर्माण की अनुमति दी गई, जिससे वेस्ट बैंक आधे हिस्से में कट जाएगा। ये कदम फिलिस्तीन के राजनीतिक और भू-राजनीतिक हितों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं और भविष्य के फिलिस्तीनी राज्य की संभावनाओं को कमजोर कर रहे हैं।




