बाबा बैद्यनाथ के दरबार पहुंचे BJP सांसद निशिकांत दुबे, बोले—'7 साल से श्राइन बोर्ड की बैठक न होना गंभीर विषय'
सावन के पवित्र महीने के बीच झारखंड के देवघर स्थित विश्व प्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथ धाम (Baba Baidyanath Dham) में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। गोड्डा लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर सांसद निशिकांत दुबे आज बाबा बैद्यनाथ के दरबार पहुंचे। उन्होंने मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर देश और अपने संसदीय क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। बाबा की पूजा के बाद मंदिर परिसर से बाहर निकलते ही सांसद ने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार और मंदिर प्रबंधन को लेकर तीखे तेवर दिखाए और श्राइन बोर्ड को लेकर एक बड़ा बयान दे डाला।
मुख्यमंत्री पर साधा निशाना, पूछा—आखिर क्यों ठंडे बस्ते में है श्राइन बोर्ड?
मीडियाकर्मियों से मुखातिब होते हुए सांसद निशिकांत दुबे ने देवघर मंदिर प्रबंधन और विकास कार्यों को लेकर राज्य सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बाबा बैद्यनाथ धाम विकास श्राइन बोर्ड (Shrine Board) का गठन इसीलिए किया गया था ताकि मंदिर की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को वैश्विक स्तर का बनाया जा सके।
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सात साल से कोई बैठक नहीं: सांसद ने आरोप लगाया कि पिछले 7 वर्षों से श्राइन बोर्ड की एक भी आधिकारिक बैठक नहीं बुलाई गई है, जो बेहद चिंताजनक और गंभीर विषय है।
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मुख्यमंत्री की उदासीनता: उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को घेरते हुए कहा कि चूंकि मुख्यमंत्री ही इस बोर्ड के अध्यक्ष होते हैं, इसलिए यह उनकी सीधी जिम्मेदारी है। लेकिन राज्य सरकार को सनातनियों की आस्था और इतने बड़े तीर्थ स्थल के विकास से कोई सरोकार नहीं रह गया है।
श्रद्धालुओं की सुविधाओं में लापरवाही का लगाया आरोप
सांसद ने कहा कि सावन के महीने में देश-विदेश से लाखों की संख्या में कांवड़िये और श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा नगरी पहुंचते हैं। ऐसे में बोर्ड की बैठक न होने के कारण कई बड़े फैसले और विकास परियोजनाएं लटकी हुई हैं।
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अव्यवस्थाओं का बोलबाला: उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर बैठकों के अभाव में रूट लाइनिंग, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों में कमियां साफ देखी जा सकती हैं।
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भ्रष्टाचार की आशंका: समय पर ऑडिट और समीक्षा बैठकें न होने के कारण मंदिर के राजस्व और विकास कार्यों की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिसे लेकर वे चुप नहीं बैठेंगे।
केंद्रीय स्तर पर आवाज उठाने की दी चेतावनी
निशिकांत दुबे ने साफ लहजे में कहा कि यदि राज्य सरकार जल्द ही श्राइन बोर्ड की बैठक बुलाकर मंदिर के कायाकल्प और सुरक्षा व्यवस्था पर कड़े कदम नहीं उठाती है, तो वे इस मामले को केंद्रीय गृह मंत्रालय और संसद के पटल पर भी उठाएंगे। उन्होंने मांग की कि बाबाधाम की व्यवस्था को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय पूरी तरह से आस्थावानों के अनुकूल बनाया जाना चाहिए ताकि यहां आने वाले किसी भी शिवभक्त को परेशानी का सामना न करना पड़े।