झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की समय-सीमा आगे बढ़ी
भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी, त्रुटिरहित और निष्पक्ष बनाने की दिशा में काम कर रहे भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने झारखंड राज्य से जुड़ा एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी 'एसआईआर' (SIR) अभियान के तहत अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की समय-सीमा को एक बार फिर से बढ़ा दिया गया है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) कार्यालय झारखंड से प्राप्त आधिकारिक जानकारियों के अनुसार, विभिन्न जिलों से आ रहे अनुरोधों और जमीनी स्तर पर चल रहे सत्यापन कार्यों की व्यापकता को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने नई संशोधित समय-सारिणी (Revised Schedule) को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस बदलाव के बाद अब राज्यभर के करोड़ों मतदाताओं का इंतजार थोड़ा और लंबा हो गया है, क्योंकि अब अंतिम और संशोधित मतदाता सूची का प्रकाशन 7 अक्टूबर या 19 अक्टूबर के बजाय सीधे 30 नवंबर को किया जाएगा। निर्वाचन आयोग के इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से छूटने न पाए और हर एक प्रविष्टि पूरी तरह से सत्यापित हो सके।
क्या है नई संशोधित समय-सारिणी? जानिए 30 नवंबर तक किन-किन चरणों से गुजरेगी पूरी पुनरीक्षण प्रक्रिया
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार द्वारा दी गई विस्तृत जानकारी के अनुसार, जिला निर्वाचन पदाधिकारियों और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को नए और निर्धारित समय-चक्र के तहत सभी लंबित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। इस नई समय-सारिणी के तहत नागरिकों द्वारा दर्ज कराए गए सभी दावों और आपत्तियों के निस्तारण की अंतिम तिथि 23 नवंबर निर्धारित की गई है। इसके तुरंत बाद, 24 से 29 नवंबर के बीच मतदाता सूची के आंकड़ों से संबंधित सभी मानकों की बारीकी से जांच की जाएगी, तथा अंतिम प्रकाशन एवं मुद्रण के लिए आयोग से औपचारिक अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके अलावा, नो-मैपिंग और तार्किक विसंगतियों (Logical Discrepancies) से जुड़े नोटिसों के निष्पादन और घर-घर जाकर बीएलओ द्वारा सत्यापन का कार्य भी अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक पूरी सतर्कता के साथ पूरा किया जाएगा। इन सभी प्रशासनिक चरणों को पार करने के बाद आखिरकार 30 नवंबर को झारखंड की अंतिम और अपडेटेड मतदाता सूची का आधिकारिक रूप से प्रकाशन कर दिया जाएगा, जिसे आम नागरिक भी ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से देख सकेंगे।
क्यों बढ़ानी पड़ी निर्वाचन आयोग को समय-सीमा? जिला प्रशासन के अनुरोध और जमीनी सत्यापन की वजह आई सामने
राजनीतिक हलकों और प्रशासनिक गलियारों में इस बात की चर्चा आम थी कि आखिर बार-बार समय-सीमा बदलने के पीछे असली वजह क्या है, तो इसका मुख्य कारण जिला स्तर पर चल रहे सत्यापन कार्यों की विशालता और जटिलता है। झारखंड के विभिन्न जिलों से जिला निर्वाचन पदाधिकारियों ने आयोग को यह अवगत कराया था कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें दस्तावेजों का मिलान और घर-घर जाकर (Home-to-Roll Verification) सत्यापन करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। चूंकि लोकतंत्र में हर एक नागरिक का मताधिकार सुरक्षित रखना निर्वाचन आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता होती है, इसलिए किसी भी जल्दबाजी से बचने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई थी, जिसे आयोग ने स्वीकार कर लिया। इस प्रक्रिया के दौरान छूटे हुए पात्र नागरिकों के फॉर्म-6 के डिजिटाइजेशन और जिला निर्वाचन अधिकारियों, रोल ऑब्जर्वर तथा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी स्तर पर होने वाली सुपर-चेकिंग (Super Checking) को भी इस नई समय-सीमा के भीतर बेहद पारदर्शिता के साथ पूरा किया जा रहा है।
राजनीतिक दलों और आम जनता की प्रतिक्रिया, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
निर्वाचन आयोग द्वारा उठाए गए इस कदम का स्वागत करते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का यह मानना है कि यदि सूची के पुनरीक्षण में थोड़ी और गहराई लाई जाती है, तो भविष्य में होने वाले चुनावों में किसी भी प्रकार की धांधली या तकनीकी त्रुटि की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। आयोग ने सभी जिला प्रशासनों को यह सख्त निर्देश दिए हैं कि वे पूरी ईमानदारी से यह सुनिश्चित करें कि कोई भी अपात्र या फर्जी व्यक्ति सूची में शामिल न हो सके और एक भी असली मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रहे। अंततः, 30 नवंबर को होने वाला यह अंतिम प्रकाशन झारखंड के चुनावी परिदृश्य को एक नया और पूरी तरह साफ-सुथरा रूप देगा, जिससे राज्य के लोकतांत्रिक ताने-बाने को और अधिक मजबूती मिलेगी।