झारखंड के ग्रामीण अंचलों में बच्चा चोर गिरोहों का बढ़ता खौफ
देश के खनिज संपदा से समृद्ध और आदिवासी बहुल राज्य झारखंड से इस वक्त एक बेहद संवेदनशील, डरावनी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जिसने राज्य के आम नागरिकों से लेकर पुलिस प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। राज्य के विभिन्न जिलों और ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ महीनों के दौरान बच्चों के गायब होने और बच्चा चोर गिरोहों (Child Lifting Gangs) की सक्रियता को लेकर जो खबरें सामने आ रही थीं, उन पर अब एक बहुत बड़ा और भयानक सच से पर्दा उठ गया है। आए दिन चौपालों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर चर्चाएं आम हो चुकी हैं और माता-पिता के मन में एक अज्ञात खौफ समाया हुआ है। इस बीच, पुलिस की विशेष अनुसंधान टीमों ने एक के बाद एक ऐसे खतरनाक सिंडिकेट्स का खुलासा किया है, जिन्होंने यह साबित कर दिया है कि यह केवल स्थानीय स्तर की घटनाएं नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय और संगठित आपराधिक नेटवर्क काम कर रहा है।
गुलगुलिया गैंग के आतंक के बाद अब 'तीनपहाड़ गैंग' का भयानक पर्दाफाश
झारखंड के संताल परगना और आसपास के इलाकों में पहले से ही 'गुलगुलिया गैंग' की संदिग्ध गतिविधियों और बच्चा चोरी की वारदातों को लेकर भारी दहशत का माहौल बना हुआ था। लोग अपने बच्चों को घरों से बाहर भेजने में कतराने लगे थे और कई जगहों पर तो ग्रामीणों ने रात-रातभर जागकर अपने गांवों की पहरेदारी करना शुरू कर दिया था। इस शुरुआती खौफ के बीच पुलिस ने जब अपनी जांच का दायरा बढ़ाया और खुफिया सूचनाओं को खंगाला, तो एक और नए और बेहद शातिर गिरोह का नाम सामने आया, जिसे अपराध की दुनिया में 'तीनपहाड़ गैंग' के नाम से जाना जा रहा है। इस गैंग के तौर-तरीके इतने खौफनाक और पेशेवर हैं कि ये पलक झपकते ही बच्चों को निशाना बनाते हैं और उन्हें ऐसी गुप्त जगहों पर छुपा देते हैं जहां तक पहुंचना पुलिस के लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं होता है।
बांग्लादेशी कनेक्शन और सीमा पार से संचालित हो रहे अवैध नेटवर्क की पुष्टि
इस पूरे खुलासे का सबसे खतरनाक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि पुलिस की पूछताछ और तकनीकी सर्विलांस के दौरान यह बात सामने आई है कि इस 'तीनपहाड़ गैंग' और अन्य बच्चा चोर सिंडिकेट्स के तार सीधे तौर पर पड़ोसी देश बांग्लादेश से जुड़े हुए हैं। झारखंड की सीमा से सटे इलाकों और पूर्वोत्तर के रास्तों का फायदा उठाकर ये अपराधी आसानी से अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार कर जाते हैं। बच्चों का अपहरण करने के बाद उन्हें तुरंत अंतर-राज्यीय और फिर सीमा पार अवैध तस्करी के रास्तों के जरिए दूसरे ठिकानों पर भेज दिया जाता है, जहां मानव तस्करी (Human Trafficking) करने वाले बड़े सिंडिकेट्स सक्रिय हैं। जब सुरक्षा एजेंसियों को यह पता चला कि इन आपराधिक गतिविधियों के पीछे बांग्लादेशी घुसपैठियों और सीमा पार के तस्करों का हाथ है, तो देश की आंतरिक सुरक्षा में सेंध लगने को लेकर चिंताएं कई गुना बढ़ गईं।
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की ताबड़तोड़ छापेमारी और गिरफ्तारियां
जैसे ही झारखंड पुलिस और सीआईडी (CID) को इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट के बारे में पुख्ता सुराग मिले, राज्य के पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया। साहिबगंज, पाकुड़ और संताल परगना के अन्य संवेदनशील इलाकों में तीनपहाड़ गैंग के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की कार्रवाई शुरू कर दी गई। पुलिस ने इस दौरान कुछ संदिग्धों को हिरासत में भी लिया है जिनसे गहन पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में यह खुलासा हुआ है कि ये गिरोह गरीब और आदिवासी परिवारों के बच्चों को आसान निशाना बनाते हैं और उन्हें बहला-फुसलाकर या जबरन अगवा कर लेते हैं। इस कार्रवाई के बाद से स्थानीय स्तर पर लोगों ने राहत की सांस जरूर ली है, लेकिन इस बात को लेकर गुस्सा भी है कि आखिर कैसे बाहरी अपराधी इतनी आसानी से स्थानीय व्यवस्था में पैठ बना लेते हैं।
समाज की सुरक्षा, अभिभावकों की सतर्कता और भविष्य की बड़ी चुनौतियां
झारखंड में बच्चा चोर गिरोहों का यह खौफ और विशेषकर तीनपहाड़ गैंग का बांग्लादेशी कनेक्शन इस बात की ओर स्पष्ट इशारा करता है कि राज्य में आंतरिक सुरक्षा और सीमावर्ती निगरानी को और अधिक सख्त करने की कितनी ज्यादा जरूरत है। सरकार और पुलिस प्रशासन दोनों के लिए यह एक बहुत बड़ी अग्निपरीक्षा है कि वे इस पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकें ताकि कोई भी मां अपनी गोद सूनी होने के डर से न जीए। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों को भी यह सलाह दी जा रही है कि वे अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर अत्यधिक सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। आने वाले दिनों में सुरक्षा एजेंसियां इस अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और बच्चा चोर रैकेट के खिलाफ और भी बड़े एक्शन लेने की तैयारी कर रही हैं, जिससे इस काले कारोबार का पूरी तरह से सफाया किया जा सके।