जमशेदपुर: जब खटिया पर लादकर ले जानी पड़ी ग्राम प्रधान की जान, आधे रास्ते से लौटे SDO के बाद प्रशासन जागा; अब शुरू हुआ सड़क निर्माण
झारखंड के जमशेदपुर से प्रशासनिक लापरवाही और ग्रामीण लाचारी की एक ऐसी दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। जिले के एक सुदूर ग्रामीण इलाके में पक्की सड़क न होने के कारण एक गांव के प्रधान (मुखिया) की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें एम्बुलेंस तक नसीब नहीं हो सकी। लाचार ग्रामीणों को मजबूरन ग्राम प्रधान को एक खटिया (चारपाई) पर लादकर कई किलोमीटर पैदल पथरीले रास्तों से होते हुए मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ा, ताकि उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा सके। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जब प्रशासन की फजीहत हुई, तो जांच करने पहुंचे घाटशिला के एसडीओ (SDO) खुद आधे रास्ते से वापस लौट आए क्योंकि रास्ता चलने लायक ही नहीं था। हालांकि, इस भारी फजीहत के बाद अब प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है और गांव में वर्षों से लंबित सड़क निर्माण का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है।
एम्बुलेंस नहीं पहुंची तो खटिया बनी सहारा, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
यह पूरी घटना जमशेदपुर के पोटका या घाटशिला अनुमंडल के अंतर्गत आने वाले एक दुर्गम पहाड़ी गांव की है। सालों से बुनियादी सुविधाओं और पक्की सड़क की मांग कर रहे ग्रामीणों के सब्र का बांध तब टूट गया, जब खुद उनके गांव के प्रधान अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गए। गांव तक कोई भी चार पहिया वाहन या एम्बुलेंस आने का रास्ता नहीं था, क्योंकि पूरा रास्ता बड़े-बड़े पत्थरों, गड्ढों और झाड़ियों से भरा पड़ा था। गांव के युवाओं और परिजनों ने बिना समय गंवाए ग्राम प्रधान को एक खटिया पर सुलाया और उसे अपने कंधों पर उठाकर उबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए करीब 4 से 5 किलोमीटर का सफर तय किया। इस घटना ने डिजिटल इंडिया और ग्रामीण विकास के दावों के बीच प्रशासनिक उदासीनता को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
जब गांव का रास्ता नहीं नाप पाए अधिकारी, आधे रास्ते से बैरंग लौटे SDO
खटिया पर मरीज को ले जाने की यह शर्मनाक तस्वीर जैसे ही उच्च अधिकारियों और सोशल मीडिया के माध्यम से जिला प्रशासन तक पहुंची, हड़कंप मच गया। मामले की जमीनी हकीकत जानने और जांच करने के लिए स्थानीय अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) अपनी पूरी टीम और गाड़ियों के काफिले के साथ गांव के लिए रवाना हुए। लेकिन सिस्टम की विडंबना देखिए कि ग्रामीणों की रोजमर्रा की दुर्दशा की जांच करने निकले साहब की गाड़ियां गांव के मुहाने से पहले ही फंस गईं। पथरीले और बेहद संकरे रास्ते के कारण आगे बढ़ना नामुमकिन हो गया, जिसके बाद SDO को आधे रास्ते से ही बैरंग वापस लौटना पड़ा। अधिकारियों को खुद अहसास हो गया कि जिस रास्ते पर वे पैदल भी नहीं चल पा रहे हैं, वहां ग्रामीण दशकों से कैसे जिंदगी बसर कर रहे हैं।
प्रशासन की खुली नींद, भारी मशीनों के साथ गांव पहुंचा विभाग
एसडीओ के आधे रास्ते से लौटने और मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला उपायुक्त (DC) ने तुरंत कड़ा संज्ञान लिया। ग्रामीण विकास विभाग और पथ निर्माण विभाग को बिना किसी देरी के सड़क निर्माण शुरू करने का सख्त अल्टीमेटम जारी किया गया। नतीजा यह हुआ कि जिस गांव में सालों से एक सरकारी मुलाजिम ने कदम नहीं रखा था, वहां अगले ही दिन जेसीबी (JCB), रोलर और भारी निर्माण सामग्री पहुंच गई। ग्रामीणों के विरोध और मीडिया के दबाव के बाद अब पक्की सड़क का निर्माण कार्य आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया गया है। ग्रामीणों ने इस बदलाव पर खुशी तो जताई है, लेकिन उनका कहना है कि अगर यह कदम पहले उठा लिया गया होता, तो आज गांव के प्रधान को इस तरह जान जोखिम में डालकर खटिया पर नहीं जाना पड़ता।