झारखंड सरकार का अल्टीमेटम! सिर्फ 3 दिन के भीतर निपटाएं टेंडर, नहीं तो नपेंगे अधिकारी
झारखंड में स्वीकृत ग्रामीण सड़कों और पुल निर्माण परियोजनाओं की सुस्त रफ्तार पर ग्रामीण कार्य विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। राज्य में विकास योजनाओं को रफ्तार देने के लिए विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। दरअसल, तय समय-सीमा के भीतर टेंडरों का निपटारा न होने के कारण ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे से जुड़े कई महत्वपूर्ण विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। इस प्रशासनिक लेतीफी को देखते हुए विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को 15 जुलाई तक हर हाल में लंबित टेंडरों का निष्पादन पूरा करने की अंतिम समय-सीमा (डेडलाइन) दे दी है।
री-टेंडर के लिए 20 जुलाई की आखिरी तारीख, अभियंताओं में खलबली
मुख्य टेंडरों के अलावा, विभाग ने विशेष रूप से पीएम जन मन योजना-2 और योजना-3 के तहत आने वाले री-टेंडर (पुनः निविदा) की प्रक्रिया को भी तेजी से निपटाने को कहा है। इसके लिए 20 जुलाई तक का समय निर्धारित किया गया है। विभागीय सचिव से मिले इस कड़े और स्पष्ट निर्देश के बाद मुख्य अभियंताओं, ठेकेदारों और संबंधित विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया है, और वे निर्माण कार्य जल्द से जल्द धरातल पर शुरू कराने के लिए टेंडर फाइलों को तेजी से आगे बढ़ाने में जुट गए हैं।
पीएम जन मन योजना 2 और 3 में फंसा पेंच, समय पर काम पूरा होने में संशय
झारखंड के सुदूर ग्रामीण और आदिम जनजातीय बहुल क्षेत्रों में बेहतर रोड कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार की मदद से 'पीएम जन मन योजना' संचालित की जाती है। इस बेहद महत्वपूर्ण योजना के तहत बैच-2 और बैच-3 में कुल 139 सड़कों और 127 पुलों के निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी।
विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि इनमें से एक भी विकास परियोजना के लिए अब तक 'लेटर ऑफ अवार्ड' (LoA) जारी नहीं किया जा सका है और सभी टेंडर फाइलों में दबे पड़े हैं। इन योजनाओं के लिए दोबारा निकाली गई निविदाओं को 20 जुलाई तक फाइनल करने का टारगेट दिया गया है, लेकिन क्षेत्र के इंजीनियरों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में टेंडरों की तकनीकी जांच और आवंटन इस बेहद कम समय में कर पाना नामुमकिन सा है, जिससे यह पूरा मामला अधर में लटक सकता है।