घर के गेट बंद, बाहर भारी फोर्स तैनात! हजारीबाग के हुरहुरू में घंटों चली मैराथन जांच से मची भारी सनसनी

घर के गेट बंद, बाहर भारी फोर्स तैनात! हजारीबाग के हुरहुरू में घंटों चली मैराथन जांच से मची भारी सनसनी

झारखंड के हजारीबाग जिले में बुधवार तड़के उस वक्त हड़कंप मच गया, जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की पटना शाखा ने स्थानीय पुलिस बल के साथ मिलकर दो आवासीय ठिकानों पर अचानक छापेमारी शुरू कर दी। केंद्रीय जांच एजेंसी की यह सख्त कार्रवाई बड़ा बाजार थाना क्षेत्र के हुरहुरू स्थित बाबा पथ, सुभाष बारला मार्ग पर स्थित दो सगे भाइयों—प्रदीप साव और उदय साव के मकानों पर की गई। देशव्यापी स्तर पर फैले नकली भारतीय मुद्रा नोट (FICN) और संदिग्ध हवाला सिंडिकेट के इनपुट मिलने के बाद एनआईए की टीम ने दोनों ठिकानों को एक साथ अपने सुरक्षा घेरे में लेकर सघन तलाशी अभियान चलाया।

कार्रवाई शुरू होते ही सुरक्षा की दृष्टि से दोनों घरों के मुख्य प्रवेश द्वार पूरी तरह सील कर दिए गए। परिसर के भीतर बाहरी व्यक्तियों की आवाजाही पर सख्त रोक लगा दी गई और पड़ोसियों को भी सुरक्षा घेरे से दूर रखा गया, जिससे पूरे हुरहुरू इलाके में सुबह से ही गहमागहमी और तनाव का माहौल देखा गया। प्रारंभिक खुफिया सूचनाओं के मुताबिक, पटना शाखा को पुख्ता सुराग मिले थे कि हजारीबाग के इस आवासीय क्षेत्र से देशव्यापी जाली नोटों की खेप और उससे जुड़े हवाला ट्रांजेक्शन के तार जुड़े हो सकते हैं। इसी कड़ी में एजेंसी यह तफ्तीश करने पहुंची कि क्या इन दोनों भाइयों अथवा उनके संपर्कों का संबंध इस संगठित गिरोह से है, हालांकि प्राथमिक स्तर पर एजेंसी ने संलिप्तता की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

छापेमारी के दौरान एनआईए के जांच अधिकारियों ने दोनों परिसरों के हर हिस्से की बारीकी से पड़ताल की। सूत्रों के अनुसार, टीम ने बैंक खातों, जमीन-जायदाद से जुड़े वित्तीय कागजात, संदिग्ध डायरियों, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की तकनीकी जांच की। इसके साथ ही घर में मौजूद सदस्यों से वित्तीय स्रोतों और कारोबारी लेन-देन को लेकर अलग-अलग पूछताछ की गई। घंटों चली इस मैराथन जांच के बाद टीम जरूरी डिजिटल व दस्तावेजी रिकॉर्ड लेकर वहां से रवाना हो गई। अभियान के दौरान मौके से किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हुई है। फिलहाल एनआईए या जिला पुलिस की तरफ से कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है; जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डेटा की फॉरेंसिक पड़ताल के बाद ही जांच की अगली दिशा तय होगी।