सजा खत्म, अदालत से बरी... फिर भी 4 साल तक ज्यादती; डिटेंशन सेंटर में बांग्लादेशी महिला से रेप

सजा खत्म, अदालत से बरी... फिर भी 4 साल तक ज्यादती; डिटेंशन सेंटर में बांग्लादेशी महिला से रेप

झारखंड के हजारीबाग स्थित डिटेंशन सेंटर में बंद एक बांग्लादेशी महिला के साथ हुए दुष्कर्म मामले में बड़ा प्रशासनिक एक्शन हुआ है। राज्य सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट को सूचित किया है कि आरोपी तीनों सिपाहियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सुनवाई के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) ने अदालत में एक सीलबंद रिपोर्ट पेश की, जिसमें तीनों पुलिसकर्मियों द्वारा महिला के साथ दुष्कर्म किए जाने की पुष्टि का उल्लेख है। अदालत ने इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर करते हुए याचिकाकर्ता से सरकार के जवाब पर प्रतिउत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने पक्ष रखते हुए कहा कि महिला को उसके वतन वापस भेजने के लिए वर्ष 2023 से लगातार केंद्रीय विदेश मंत्रालय के साथ पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। इस पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता को स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब पेश करने को कहा है। दरअसल, एक सामाजिक कार्यकर्ता की ओर से दाखिल रिट याचिका में उजागर किया गया था कि हजारीबाग के लोहसिंघना थाने से जुड़े मामले में अदालत से दोषमुक्त होने के बावजूद महिला को डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। याचिका की सुनवाई के दौरान ही पीड़िता ने खुलासा किया था कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच डिटेंशन सेंटर में उसके साथ लगातार ज्यादती की गई।

सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक महिला के खिलाफ वर्ष 2018 में दो अलग-अलग मामले दर्ज हुए थे, जिनमें एक मामला बच्चे के अपहरण और दूसरा विदेशी नागरिक अधिनियम से जुड़ा था। अपहरण मामले में उसे दो वर्ष और 2021 में विदेशी नागरिक कानून के तहत तीन वर्ष की सजा सुनाई गई थी। सजा भुगतने के बाद उसे डिटेंशन सेंटर भेजा गया, जहां से वह वर्ष 2025 में कथित तौर पर फरार हो गई थी। बाद में दोबारा पकड़े जाने पर उसके खिलाफ फिर विदेशी अधिनियम का मामला बना, लेकिन अदालत ने वर्ष 2026 में उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया।

अदालत ने सुनवाई के दौरान महिला को तय सजा पूरी होने के बाद भी वर्षों तक हिरासत में रखे जाने पर कड़ा ऐतराज जताया। हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए पूछा कि यदि महिला को वर्ष 2021 में मिली तीन साल की सजा खत्म हो चुकी थी, तो उसे फौरन बांग्लादेश क्यों नहीं भेजा गया और डिटेंशन सेंटर में अनिश्चितकाल तक रखने की क्या जरूरत थी। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब वर्ष 2026 में वह बरी हो चुकी थी, तो उसके खिलाफ राज्य सरकार ने ऊपरी अदालत में अपील क्यों नहीं की और अब तक उसकी रिहाई की राह क्यों रोकी गई।