तालिबान ने ठुकराया ICC का अरेस्ट वारंट, कहा- 'न अदालत को मानते हैं, न उसके फैसले को'

तालिबान ने ठुकराया ICC का अरेस्ट वारंट, कहा- 'न अदालत को मानते हैं, न उसके फैसले को'

अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) द्वारा अफगानिस्तान के चार शीर्ष तालिबानी नेताओं के खिलाफ जारी अरेस्ट वारंट पर तालिबान प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने आधिकारिक बयान जारी कर इस वारंट को पूरी तरह खारिज कर दिया। मुजाहिद ने दो टूक शब्दों में कहा कि तालिबान के चारों वरिष्ठ अधिकारी इस गिरफ्तारी वारंट को नहीं मानते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि काबुल प्रशासन आईसीसी जैसी किसी भी तथाकथित संस्था या अदालत को कोई मान्यता नहीं देता और न ही उसके किसी फैसले की उनके लिए कोई अहमियत है।

प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने हेग स्थित अदालत के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देते हुए कहा कि अफगानिस्तान पूरी तरह से इस्लामिक कानून और शरिया के सिद्धांतों पर संचालित होता है। उन्होंने कहा कि इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान के नेताओं ने ऐसा कोई काम नहीं किया है जिसके लिए कोई बाहरी अदालत उन्हें गुनहगार ठहराकर गिरफ्तारी का वारंट निकाल सके या सजा दे सके। मुजाहिद ने जोर देकर कहा कि मुल्क केवल इस्लामिक शरिया और अपनी अदालतों के फैसलों से बंधा है, न कि विदेशी खुफिया एजेंसियों या पश्चिमी अदालतों के मनमाने निर्देशों से।

अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने सोमवार को अफगानिस्तान के कार्यवाहक शिक्षा मंत्री हबीबुल्लाह आगा और उच्च शिक्षा मंत्री नेदा मोहम्मद नदीम के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट को सार्वजनिक किया है। इससे पहले अदालत देश के सर्वोच्च नेता मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदजादा और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अब्दुल हकीम हक्कानी के विरुद्ध भी इसी तरह का वारंट जारी कर चुकी है। वैश्विक अदालत ने इन चारों वरिष्ठ तालिबानी नेताओं पर अफगानिस्तान में महिलाओं और बालिकाओं के साथ संस्थागत लिंग-आधारित उत्पीड़न (Gender-based Persecution) करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

आईसीसी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, शिक्षा मंत्री हबीबुल्लाह आगा और उच्च शिक्षा मंत्री नेदा मोहम्मद नदीम के खिलाफ गिरफ्तारी आदेश 9 सितंबर 2025 को ही जारी किए जा चुके थे। अदालत ने रणनीतिक और प्रक्रियागत कारणों से इन्हें अब तक गोपनीय रखा हुआ था, जिसे अब औपचारिक रूप से सार्वजनिक कर दिया गया है। तालिबान के इस कड़े रुख के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय, मानवाधिकार संगठनों और काबुल प्रशासन के बीच गतिरोध और गहराने के आसार बन गए हैं।