झारखंड में लाल आतंक पस्त! 10 लाख के इनामी जोनल कमांडर समेत 4 खूंखार नक्सलियों ने किया सरेंडर
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। तीन दशकों तक लाल आतंक का गढ़ रहे कोल्हान क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान को मंगलवार को एक ऐतिहासिक सफलता मिली।
चाईबासा स्थित कोल्हान पुलिस मुख्यालय में चार कुख्यात और हार्डकोर नक्सलियों ने पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सामने अपने हथियार डाल दिए। इन सभी ने झारखंड सरकार की 'उग्रवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति' (Surrender and Rehabilitation Policy) से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने का बड़ा फैसला किया है।
10 लाख का इनामी जोनल कमांडर भी शामिल, देखें लिस्ट
पुलिस के सामने सरेंडर करने वाले इन नक्सलियों के पास से भारी मात्रा में हथियार, कारतूस और नक्सली गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाला सामान भी पुलिस को सौंपा गया है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों में संगठन के बड़े चेहरे शामिल हैं-
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सालुका कयाम (उर्फ भुवनेश्वर): यह नक्सली संगठन का जोनल कमांडर था और इस पर 10 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित था।
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कोदोमुनी कोड़ा: संगठन में अहम भूमिका निभाने वाले इस नक्सली पर 1 लाख रुपये का इनाम था।
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अनिता तामसोय (उर्फ अनिता कयाम): लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय (सरायकेला-खरसावां पुलिस के समक्ष सरेंडर)।
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पिंकी: कई नक्सली वारदातों में शामिल रही हार्डकोर महिला नक्सली।
4 सालों में 75 नक्सलियों ने छोड़ा आतंक का रास्ता
कोल्हान के उपमहानिरीक्षक (DIG) अनुरंजन किस्टोपा और पश्चिमी सिंहभूम के SP अमित रेणु की मौजूदगी में हुए इस सरेंडर को सुरक्षा बलों के खुफिया तंत्र और मजबूत रणनीति की बड़ी जीत माना जा रहा है। पुलिस आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में कोल्हान क्षेत्र में अब तक 75 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। वहीं मिसिर बेसरा जैसे कई बड़े कमांडरों की गिरफ्तारी और एनकाउंटर ने नक्सली संगठनों की कमर तोड़ कर रख दी है।