जंतर-मंतर पर मचे बवाल के बीच मेडिकल छात्रों की बड़ी जीत! सरकार ने खत्म किया 1 साल का अनिवार्य MBBS बॉन्ड
देश के भावी डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। पिछले काफी समय से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे मेडिकल स्टूडेंट्स के आगे आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा है। एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए राज्य सरकार ने एमबीबीएस (MBBS) के बाद दी जाने वाली अनिवार्य 1 साल की सरकारी बॉन्ड सर्विस (Mandatory Bond Service) को पूरी तरह से समाप्त करने का ऐलान कर दिया है।
जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन का बड़ा असर
लंबे समय से देश के अलग-अलग हिस्सों और विशेष रूप से दिल्ली के जंतर-मंतर पर मेडिकल छात्र बॉन्ड पॉलिसी के खिलाफ शांतिपूर्ण लेकिन आक्रामक प्रदर्शन कर रहे थे। छात्रों का तर्क था कि अनिवार्य बॉन्ड सेवा के कारण उनकी आगे की उच्च शिक्षा (Post Graduation) और करियर की राह में रुकावटें आ रही थीं। सरकार के इस ताजा फैसले को जंतर-मंतर पर डटे इन डॉक्टरों और छात्रों के संघर्ष की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
क्या थी अनिवार्य बॉन्ड पॉलिसी और क्यों था इसका विरोध?
पुरानी व्यवस्था के तहत, सरकारी मेडिकल कॉलेजों से कम फीस पर MBBS की पढ़ाई पूरी करने वाले हर छात्र को डिग्री मिलने के बाद अनिवार्य रूप से 1 साल तक ग्रामीण या सरकारी अस्पतालों में अपनी सेवाएं देनी होती थीं। ऐसा न करने पर छात्रों को भारी-भरकम जुर्माना (बॉन्ड राशि) चुकाना पड़ता था। छात्र इस नीति को हटाने की मांग कर रहे थे ताकि वे बिना किसी मानसिक दबाव के अपनी स्पेशलाइजेशन की पढ़ाई या प्रैक्टिस शुरू कर सकें। सरकार के इस कदम के बाद अब छात्रों को बिना किसी बॉन्ड के तुरंत अपनी डिग्री और इंटर्नशिप सर्टिफिकेट मिल जाएगा।
मेडिकल एसोसिएशन ने किया फैसले का स्वागत, छात्रों में जश्न
सरकार द्वारा आधिकारिक आदेश जारी होते ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और देश के विभिन्न मेडिकल एसोसिएशन्स में खुशी की लहर दौड़ गई है। रेजिडेंट डॉक्टर्स और मेडिकल स्टूडेंट्स ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर इस फैसले का स्वागत किया। जानकारों का मानना है कि इस राज्य सरकार के फैसले के बाद अब देश के अन्य राज्यों पर भी अपने यहां लागू जटिल और सख्त मेडिकल बॉन्ड पॉलिसी की समीक्षा करने का भारी दबाव बनेगा।