CBSE का बड़ा बदलाव: 9वीं में तीसरी भाषा (R3) में फेल होने पर भी मिलेगा प्रमोशन, लेकिन 10वीं के फाइनल सर्टिफिकेट पर लगेगा 'ब्रेक'
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूली शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण और छात्र-हितैषी बदलाव का ऐलान किया है। बोर्ड द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब 9वीं कक्षा के छात्र यदि अपनी तीसरी भाषा (Third Language - R3) में फेल हो जाते हैं, तब भी उन्हें 10वीं कक्षा में प्रोन्नत (Promote) कर दिया जाएगा। यह फैसला उन छात्रों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो मुख्य विषयों में तो बेहतर प्रदर्शन करते हैं, लेकिन तीसरी भाषा के कारण उनका साल बर्बाद हो जाता था। हालांकि, इस राहत के साथ बोर्ड ने एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी है, जिसे समझना हर छात्र और अभिभावक के लिए जरूरी है।
तीसरी भाषा में फेल, फिर भी अगली कक्षा में प्रवेश
बोर्ड के नियमों के मुताबिक, अभी तक 9वीं कक्षा पास करने के लिए सभी विषयों में उत्तीर्ण होना अनिवार्य था। यदि कोई छात्र तीसरी भाषा में फेल होता था, तो उसे उसी कक्षा में रुकना पड़ता था। अब सीबीएसई ने इस प्रक्रिया को लचीला बनाया है। नई व्यवस्था के तहत, 9वीं में तीसरी भाषा में अनुत्तीर्ण होने वाले छात्र को 10वीं कक्षा में जाने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन उसे अपनी इस कमी को पूरा करने का मौका आगे भी मिलेगा।
10वीं के फाइनल सर्टिफिकेट के लिए 'पास' होना जरूरी
सीबीएसई ने साफ कर दिया है कि 9वीं में प्रमोशन मिलना एक अस्थायी राहत है, न कि विषय से पूरी तरह मुक्ति। 10वीं कक्षा के अंत में मिलने वाले फाइनल बोर्ड सर्टिफिकेट के लिए तीसरी भाषा को पास करना अनिवार्य बना रहेगा।
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बोर्ड परीक्षा की अनिवार्य शर्त: यदि कोई छात्र 9वीं में तीसरी भाषा में फेल रहा है, तो उसे 10वीं के दौरान या बोर्ड परीक्षा के साथ ही उस विषय को फिर से उत्तीर्ण करना होगा।
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अधूरा परिणाम: बोर्ड की स्पष्ट चेतावनी है कि यदि 10वीं बोर्ड परीक्षा के समय तक छात्र ने अपनी तीसरी भाषा की परीक्षा पास नहीं की, तो उसे 'पास' घोषित नहीं किया जाएगा और उसका अंतिम प्रमाण पत्र (Final Certificate) रोक दिया जाएगा या उसे उत्तीर्ण नहीं माना जाएगा।
छात्रों पर दबाव होगा कम
शिक्षाविदों का मानना है कि सीबीएसई का यह कदम छात्रों के मानसिक दबाव को कम करने वाला है। अक्सर देखा जाता है कि गणित, विज्ञान या अंग्रेजी जैसे मुख्य विषयों में मेधावी छात्र भी क्षेत्रीय भाषा या तीसरी भाषा के कठिन पाठ्यक्रम के कारण पिछड़ जाते थे। बोर्ड के इस निर्णय से उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिलेगा और वे 10वीं में बेहतर तैयारी के साथ भाषा के विषय को क्लियर कर पाएंगे।
स्कूल प्रशासन और पेरेंट्स के लिए निर्देश
सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे छात्रों को इस नियम की स्पष्ट जानकारी दें। स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जो छात्र 9वीं में तीसरी भाषा में फेल हुए हैं, उन्हें 10वीं में अतिरिक्त कोचिंग या रिमेडियल क्लासेस के माध्यम से उस भाषा में निपुण बनाया जाए ताकि वे बोर्ड परीक्षा के समय तक उस विषय को पास करने की स्थिति में आ सकें।
यह बदलाव शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रभावी माना जा रहा है। बोर्ड का मुख्य उद्देश्य शिक्षा को समावेशी बनाना और छात्रों को असफलता के डर से मुख्यधारा की शिक्षा से दूर होने से बचाना है।