NEET Re-Exam Twist: री-एग्जाम में छात्र के साथ हुआ बड़ा खेल? 552 नंबर से सीधे 95 पर गिरा स्कोर, पहुंचा कोर्ट

NEET Re-Exam Twist: री-एग्जाम में छात्र के साथ हुआ बड़ा खेल? 552 नंबर से सीधे 95 पर गिरा स्कोर, पहुंचा कोर्ट

देशभर में नीट (NEET UG) परीक्षा को लेकर मचे बवाल और विरोध प्रदर्शनों के बीच एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के एक अभ्यर्थी ने परीक्षा में बड़े पैमाने पर विसंगति और गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए अदालत की शरण ली है। छात्र का दावा है कि मुख्य परीक्षा में जहां उसने एक बेहतरीन स्कोर हासिल किया था, वहीं दोबारा आयोजित की गई परीक्षा (Re-Exam) में उसका स्कोर अविश्वसनीय रूप से बेहद कम हो गया है। इस घटना ने एक बार फिर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की मूल्यांकन प्रक्रिया और री-एग्जाम के फैसलों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

552 से घटकर सिर्फ 95 रह गए अंक, छात्र ने लगाया बड़ा आरोप

अदालत पहुंचे छात्र ने अपनी याचिका में बताया कि जब उसने पहली बार नीट की मुख्य परीक्षा दी थी, तो आधिकारिक आंसर-की और रिजल्ट के अनुसार उसने 720 में से 552 अंकों का एक मजबूत स्कोर हासिल किया था। इस स्कोर पर उसे एक अच्छा मेडिकल कॉलेज मिलने की पूरी उम्मीद थी। हालांकि, पेपर लीक के विवादों और कुछ सेंटरों पर ग्रेस मार्क्स को लेकर उपजे विवाद के बाद जब चुनिंदा छात्रों के लिए री-एग्जाम का विकल्प दिया गया, तो उसने भी बेहतर रैंक की उम्मीद में दोबारा परीक्षा दी। लेकिन जब री-एग्जाम का रिजल्ट आया तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। छात्र को 552 की जगह केवल 95 अंक दिए गए हैं। छात्र का साफ कहना है कि उसकी ओएमआर शीट या मूल्यांकन प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही या हेरफेर की गई है।

कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, इंसाफ की गुहार

स्कोर में आए इस भारी अंतर को छात्र और उसके परिवार ने एक सोची-समझी विसंगति माना है। छात्र का तर्क है कि कोई भी मेधावी छात्र जो एक महीने पहले 552 नंबर ला रहा है, वह एक महीने बाद महज 95 नंबर पर नहीं सिमट सकता। इस संदिग्ध मूल्यांकन के खिलाफ छात्र ने अब उच्च न्यायालय का रुख किया है। याचिका में अदालत से ओएमआर शीट की दोबारा जांच कराने, परीक्षा की पूरी रीयल-टाइम रिकॉर्डिंग और मूल्यांकन के डेटा को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। छात्र के वकीलों का कहना है कि यह एक योग्य उम्मीदवार के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और जब तक इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, न्याय नहीं मिल सकता।

देशव्यापी नीट प्रोटेस्ट के बीच बढ़ीं एनटीए की मुश्किलें

यह मामला ऐसे समय पर सामने आया है जब पूरे देश में नीट पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और ग्रेस मार्क्स को लेकर छात्र संगठन और अभ्यर्थी सड़कों पर हैं। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन (NEET Protests) हो रहे हैं और मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जा रही है। ऐसे माहौल में एक छात्र के नंबरों में इतनी बड़ी गिरावट का कानूनी मोर्चे पर जाना एनटीए (NTA) की जवाबदेही को और मुश्किल में डाल सकता है। अब सभी की नजरें अदालत के रुख और इस मामले पर एनटीए द्वारा पेश किए जाने वाले स्पष्टीकरण पर टिकी हैं।

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