35,000 से ज्यादा वर्क परमिट खारिज, रिजेक्शन रेट बढ़कर 44% के पार

35,000 से ज्यादा वर्क परमिट खारिज, रिजेक्शन रेट बढ़कर 44% के पार

अमेरिका में स्थायी रूप से बसने और अपने सपनों की उड़ान भरने का सपना देख रहे लाखों विदेशी पेशेवरों, विशेषकर भारतीय आईटी वर्क्स और कुशल कारीगरों के लिए वाशिंगटन से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। यूनाइटेड स्टेट्स सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के तहत काम करने की अनुमति मांगने वाले 35,000 से भी अधिक आवेदकों के वर्क परमिट (EAD) आवेदनों को सीधे तौर पर खारिज कर दिया गया है। केवल तीन महीनों की अवधि में वर्क परमिट का रिजेक्शन रेट 25 प्रतिशत से सीधे बढ़कर रिकॉर्ड 44 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इस अप्रत्याशित फैसले के बाद अमेरिका में पहले से रह रहे और कानूनी प्रक्रिया के तहत ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी और वहां बने रहने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

क्या है फॉर्म I-765 और क्यों अचानक बढ़ा वर्क परमिट खारिज होने का आंकड़ा?

अमेरिका में जब कोई विदेशी नागरिक स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) के लिए 'एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस' (Adjustment of Status) का आवेदन जमा करता है, तो ग्रीन कार्ड की अंतिम मंजूरी मिलने तक उसे अमेरिका में कानूनी रूप से काम करने के लिए 'एम्प्लॉयमेंट ऑथराइजेशन डॉक्यूमेंट' (EAD) यानी फॉर्म I-765 भरना होता है। हालिया जारी तीसरी तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक, USCIS को कुल 1,53,039 फॉर्म I-765 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से एजेंसी ने केवल 46,405 आवेदनों को ही हरी झंडी दिखाई, जबकि 35,767 आवेदनों को एक झटके में नामंजूर ('NO') कह दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि बायोमेट्रिक विसंगतियों, कागजी दस्तावेजों में सख्त छानबीन, और आव्रजन नियमों में की जा रही हालिया प्रशासनिक सख्ती के कारण रिजेक्शन के मामलों में यह तेज उछाल दर्ज किया गया है।

6 लाख से अधिक आवेदन पेंडिंग, भारतीय पेशेवरों पर सबसे ज्यादा पड़ा असर

यूएससीआईएस के आंकड़ों से यह भी खुलासा हुआ है कि इस समय वर्क परमिट (Form I-765) की कतार में 6,71,362 से अधिक आवेदन लंबित (Pending) पड़े हुए हैं। एक आवेदक को अपने वर्क परमिट का फैसला जानने के लिए औसतन 6.4 महीने का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। चूंकि एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड ग्रीन कार्ड की कतार में सबसे अधिक संख्या भारतीय टेक वर्कर्स की है, इसलिए वर्क परमिट खारिज होने का सबसे सीधा और बुरा असर भारतीय परिवारों पर पड़ रहा है। वर्क परमिट न मिलने या खारिज होने की स्थिति में आवेदक न तो अमेरिका में नौकरी कर सकते हैं और न ही आसानी से अपनी आजीविका चला सकते हैं, जिससे कई लोगों के सामने देश लौटने तक की नौबत आ रही है।

एच-1बी और पारिवारिक वीजा की श्रेणियों में भी बढ़ी आवेदनों की अस्वीकृति

केवल वर्क परमिट ही नहीं, बल्कि अमेरिकी आव्रजन की अन्य श्रेणियों में भी रिजेक्शन का आंकड़ा चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। गैर-इमिग्रेंट अस्थायी कार्यकर्ताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म I-129 (जिसमें H-1B वीजा याचिकाएं शामिल हैं) में भी रिजेक्शन रेट बढ़कर लगभग 22 प्रतिशत दर्ज किया गया है। इसके अलावा पारिवारिक इमिग्रेशन (Form I-130) में 17% और एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड ग्रीन कार्ड के शुरुआती चरण (Form I-140) के 16% आवेदन खारिज किए गए हैं। इसके साथ ही अक्टूबर 2026 से वर्क परमिट और विभिन्न इमिग्रेशन फॉर्मों की फीस में बढ़ोतरी की योजना भी आवेदकों के लिए एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित हो रही है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में अमेरिकी इमिग्रेशन नीति और अधिक कड़ी हो सकती है, जिससे विदेशी कार्यबल को काफी संभलकर कदम उठाना होगा।