Up kiran,Digital Desk : कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के नाम से जुड़े मतदाता सूची विवाद ने एक बार फिर कानूनी तूल पकड़ लिया है। इस मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट में सोनिया गांधी की ओर से रिवीजन याचिका पर जवाब दाखिल कर दिया गया है। अब इस याचिका पर अदालत 21 फरवरी को अगली सुनवाई करेगी। मामला भारतीय नागरिकता से पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के आरोपों से जुड़ा हुआ है।
क्या है याचिका और किस आधार पर लगाए गए आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिकता प्राप्त किए बिना कथित रूप से धोखाधड़ी के जरिए अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करवाया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह प्रक्रिया नियमों के विपरीत थी और इस पर कानूनी जांच आवश्यक है। इसी को लेकर अदालत में रिवीजन याचिका दायर की गई है।
कोर्ट में दाखिल हुआ सोनिया गांधी पक्ष का जवाब
इस पूरे मामले में अब सोनिया गांधी की ओर से अदालत में औपचारिक जवाब दाखिल कर दिया गया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई की तारीख 21 फरवरी तय की है। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में अदालत इस मामले के तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विस्तार से विचार करेगी।
1980 से 1983 के बीच नाम जुड़ने-हटने का आरोप
याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी की ओर से दावा किया गया है कि सोनिया गांधी का नाम वर्ष 1980 में नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जबकि वह अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिक बनी थीं। आरोप यह भी है कि 1982 में उनका नाम मतदाता सूची से हटाया गया और फिर 1983 में दोबारा जोड़ा गया।
याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि जब सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन ही अप्रैल 1983 में किया था, तो उससे पहले वर्ष 1980 में उनका नाम मतदाता सूची में कैसे दर्ज हो गया। यही बिंदु इस पूरे विवाद की जड़ माना जा रहा है।
पहले भी हो चुकी है मामले की सुनवाई
इस प्रकरण में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) वैभव चौरसिया ने चार सितंबर 2025 को सुनवाई की थी। इसके बाद अब रिवीजन याचिका के जरिए मामला एक बार फिर अदालत के समक्ष आया है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
21 फरवरी की सुनवाई पर टिकी राजनीतिक और कानूनी नजरें
सोनिया गांधी जैसे बड़े राजनीतिक नाम से जुड़ा मामला होने के कारण इस पर राजनीतिक हलकों में भी खास नजर रखी जा रही है। 21 फरवरी को होने वाली सुनवाई से यह साफ हो सकता है कि अदालत इस विवाद को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।


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