Makar Sankranti 2022 : मकर संक्रांति पर करें इन प्रभावशाली मंत्रों का जाप, प्रसन्न होंगे सूर्य देव

हिन्दू धर्म में 14 जनवरी को पड़ने वाली मकर संक्रांति का विशेश महत्व होता है। इस साल मकर संक्रांति शुक्रवार को पड़ेगी...

हिन्दू धर्म में 14 जनवरी को पड़ने वाली मकर संक्रांति का विशेश महत्व होता है। इस साल मकर संक्रांति शुक्रवार को पड़ेगी। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इसके साथ ही इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य नमस्कार और सूर्य मंत्रों का जाप शुभ फलदायी होता है। कहते हैं कि इस दिन सूर्य नमस्कार करने से स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति को लाभ मिलता है।

surya namaskar

सूर्य नमस्कार का महत्व

सूर्य नमस्कार को 12 आसनों का संगम माना गया है। कहते हैं सूर्य नमस्‍कार का अभ्यास सुबह खाली पेट करना चाहिए। एक्सपर्ट्स के मुताबिक सूर्य नमस्‍कार की शुरुआत प्रणाम मुद्रा से होती है, इसके बाद हस्त उत्तानासन, पाद हस्तासन या पश्चिमोत्तनासन, अश्व संचालन आसन, पर्वतासन, अष्टांग नमस्कार और भुजंगासन किया जाता है। वैज्ञानिक कहते हैं कि एक सूर्य नमस्कार (12 आसन) करने के दौरान करीब 13.90 कैलोरी बर्न होती है। सामान्यत: 12 सूर्य नमस्कार से शुरुआत करते हुए और धीरे-धीरे अभ्यास करते हुए इसे 108 तक बढ़ा सकते हैं। सूर्य नमस्कार का आरंभ मकर संक्रांति से कर सकते हैं।

सूर्य नमस्कार के लाभ

सूर्य नमस्कार नियमित करने से स्वास्थ्य को काफी लाभ मिलता है। इससे पाचन तंत्र बेहतर होता है, पेट की चर्बी कम होती है और मोटापा घटता है। सूर्य नमस्कार से शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है। तनाव दूर होता है और शरीर में लचीलापन आता है। सूर्य नमस्कार करने से महिलाओं में मासिक-धर्म नियमित होने लगता है। इसके साथ ही रीढ़ की हड्डी को भी मजबूत होती हैं।

आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने।
आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते ॥

इस श्लोक का अर्थ ये है कि जो जातक सूर्य नमस्कार रोज करते हैं, उनकी आयु, प्रज्ञा, बल, वीर्य और तेज बढ़ता है। सूर्य नमस्कार रोज करने से त्वचा जनित रोग दूर होते है। कब्ज- पेट के रोगों में लाभ होता है। अध्यात्मिक पहलू है कि सूर्य नमस्कार मंत्रों के साथ सूर्य नमस्कार से सूर्य देव प्रसन्न होकर कृपा द्रष्टि बनाए रखते हैं।

सूर्य मंत्र

ॐ मित्राय नमः
ॐ रवये नमः
ॐ सूर्याय नमः
ॐ भानवे नमः
ॐ खगाय नमः
ॐ पूष्णे नमः
ॐ हिरण्यगर्भाय नमः
ॐ मरीचये नमः
ॐ आदित्याय नमः
ॐ सवित्रे नमः
ॐ अर्काय नमः
ॐ भास्कराय नमः
ॐ श्री सबित्रू सुर्यनारायणाय नमः

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