विधि विधान से हुआ बंदर का अंतिम संस्कार, कोविड प्रोटोकॉल को दरकिनार कर मत्युभोज में शमिल हुए हजारों लोग

मध्य प्रदेश में एक बंदर की मौत चर्चा का विषय बनी हुई है। बंदर की मौत ने मनुष्य और जानवरों के बीच के अनकहे रिश्ते को भी बखूबी बयां किया है...

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में एक बंदर की मौत चर्चा का विषय बनी हुई है। बंदर की मौत ने मनुष्य और जानवरों के बीच के अनकहे रिश्ते को भी बखूबी बयां किया है। दअरसल, मध्य प्रदेश के राजगढ़ में एक गांव में ठंड लगने से एक बंदर की मौत हो गई थी। बंदर की मौत के बाद गांव वालों ने जो किया वह मिसाल कायम करने वाला था।

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इस मामले में जानकारी देते हुए डालूपुरा गांव के सरपंच अर्जुन सिंह ने बताया कि उनके गांव में करीब दो सप्ताह पहले एक बंदर आया था। उस समय वह काफी बीमार लग रहा था। ग्रामीण उसे उपचार के लिए राजगढ़ भी ले गए लेकिन उसे बचा नहीं सके। उस बंदर की मौत से पूरा गांव दुखी हो गया। उन्होंने कहा हिंदू धर्म में बंदर को हनुमान जी का रूप माना जाता है। यही वजह है कि उसकी मौत के बाद इंसानों की तरह सभी कार्यक्रम पूरे गए।

सबसे पहले ग्रामीणों ने बंदर की शव यात्रा निकाली और उज्जैन ले जाकर हिंदू रीति रिवाज से उसका अंतिम संस्कार किया गया फिर तेरहवीं कार्यक्रम भी किया गया। इस दौरान गांव वालों ने मुंडन करवाया और उसकी अस्थियों को ले जाकर शिप्रा नदी में विसर्जित किया। बंदर की मौत के बाद ग्रामीणों ने मिलकर शांति भोज का भी आयोजन किया। दावा किया जा रहा है बंद के मत्युभोज में हजारों लोग शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में कढ़ी, सेव पूरी, छाछ का प्रसाद बांटा गया।

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