10, 11 और 12 अगस्त को संसद में होगा सबसे बड़ा खेला, राहुल गांधी और सरकार के बीच अंदरखाने क्या पक रहा है
संसद के मानसून सत्र में आने वाले दिन बेहद हंगामेदार और राजनीतिक रूप से भूचाल लाने वाले साबित हो सकते हैं। इसे देखते हुए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में अपने सभी सांसदों के लिए एक सख्त 3-लाइन का व्हिप (Whip) जारी किया है।
इसके तहत पार्टी के सभी सांसदों को आगामी 10, 11 और 12 अगस्त 2026 को संसद भवन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का कड़ा निर्देश दिया गया है, क्योंकि इस दौरान दोनों सदनों में देश से जुड़े "अत्यंत महत्वपूर्ण" और संवेदनशील मुद्दों पर तीखी चर्चा होनी है।
तीन दिनों तक सदन में सांसदों की मौजूदगी अनिवार्य
राज्यसभा में कांग्रेस पार्टी के मुख्य सचेतक द्वारा जारी किए गए इस तीन-पंक्ति वाले आधिकारिक व्हिप में साफ तौर पर कहा गया है कि सोमवार, मंगलवार और बुधवार यानी 10, 11 और 12 अगस्त को संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही के दौरान सदन में रहना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, कांग्रेस ने अपने विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (INDIA bloc) के तमाम सहयोगी दलों से भी यह विशेष अनुरोध किया है कि वे भी अपने-अपने सांसदों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दें कि वे इन तीनों ही महत्वपूर्ण दिनों में सदन की कार्यवाही में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। राजनीतिक गलियारों में इस अचानक जारी हुए व्हिप को लेकर कयासों का बाजार गर्म हो गया है।
क्यों जारी किया गया है यह कड़ा व्हिप?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस ने यह व्हिप ऐसे समय में जारी किया है जब सियासी गलियारों में यह तेज चर्चा है कि सरकार अगले सप्ताह संसद में बेहद विवादास्पद विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक को चर्चा के लिए लाकर पारित कराने की फिराक में है। इसके अलावा, देश में संभावित परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक पर भी सरकार द्वारा संसद में बड़ा कदम उठाए जाने की पूरी चर्चाएं हैं। हालांकि, जब हाल ही में अगले सप्ताह की संभावित सरकारी कार्यसूची (Business Agenda) सामने आई थी, तब संसदीय मामलों के राज्य मंत्री की सूची में एफसीआरए संशोधन, महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे विधेयकों का कोई सीधा उल्लेख नहीं था, जिससे रहस्य और गहरा गया है।
सरकार और राहुल गांधी के बीच परदे के पीछे बातचीत
दूसरी ओर, संसद के भीतर जारी भारी गतिरोध और हंगामे को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने विपक्षी दलों के साथ कूटनीतिक संपर्क तेज कर दिया है। सरकार ने महिला आरक्षण से जुड़े इस बहुप्रतीक्षित और प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर आम सहमति बनाने के लिए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी सीधा संपर्क साधा है। संसद में लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच गतिरोध को तोड़ने के लिए सरकार और राहुल गांधी के बीच अब तक कुल तीन दौर की बातचीत हो चुकी है, जो राजनीतिक रूप से काफी अहम मानी जा रही है।
किरेन रिजिजू ने मांगा समर्थन, डीएमके ने रखी शर्तें
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने खुद आगे बढ़कर प्रस्तावित परिसीमन विधेयक के लिए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का खुला समर्थन मांगा है। इसके जवाब में राहुल गांधी ने सरकार के सामने एक सर्वदलीय बैठक बुलाने का सुझाव दिया है और साथ ही यह संकेत भी दिए हैं कि वह इस मामले पर अपने 'इंडिया' गठबंधन के सभी प्रमुख सहयोगियों के साथ विस्तार से चर्चा करेंगे।
सरकारी सूत्रों के हवाले से एएनआई को यह जानकारी मिली है कि सरकार मुख्य विपक्षी दल होने के नाते कांग्रेस के साथ लगातार संपर्क में है, क्योंकि वह पहले ही समाजवादी पार्टी और एनसीपी (शरद पवार) जैसी प्रमुख विपक्षी पार्टियों से बातचीत कर चुकी है। वहीं दूसरी ओर, दक्षिण भारत के कद्दावर दल डीएमके (DMK) ने इस पर अपना अंतिम फैसला या समर्थन देने से पहले सरकार से कुछ पुख्ता आश्वासन मांगे हैं।
क्या है परिसीमन विधेयक 2026 का मुख्य उद्देश्य?
आपको बता दें कि देश की प्रशासनिक और राजनीतिक रूपरेखा को बदलने वाला बहुचर्चित परिसीमन विधेयक 2026 इसी साल 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। इस नए विधेयक का मुख्य उद्देश्य देश के सभी संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों का नए सिरे से पुनर्निर्धारण करना है, जिसके तहत लोकसभा की कुल सीटों की संख्या को बढ़ाकर सीधे 850 करने और साथ ही संसद व विधानसभाओं में महिलाओं के लिए ऐतिहासिक आरक्षण लागू करने का प्रावधान शामिल है।
हालांकि, जब इसे पेश किया गया था तब यह पारित नहीं हो सका था, लेकिन अब आगामी सप्ताह में इसके दोबारा पटल पर आने की सुगबुगाहट से देश की सियासत में तापमान काफी बढ़ गया है।