114 राफेल डील पर बड़ी खुशखबरी, भारत में ही बनेंगे लड़ाकू विमान

114 राफेल डील पर बड़ी खुशखबरी, भारत में ही बनेंगे लड़ाकू विमान

भारतीय वायुसेना (IAF) की मारक क्षमता को आसमान की ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए एक मेगा डिफेंस डील अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। रक्षा क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भरता को बूस्ट देते हुए भारत की 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद प्रक्रिया तय समयसीमा पर चल रही है। 

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इस बड़े रक्षा सौदे पर अहम अपडेट देते हुए बताया है कि इस वित्तीय वर्ष के अंत तक यह प्रोजेक्ट पूरा होने की पूरी संभावना है। अच्छी बात ये है कि इस बार राफेल विमानों को पूरी तरह से 'भारतीय अवतार' में तैयार किया जाएगा।

भारत में असेंबल होंगे राफेल

समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए रक्षा सचिव ने स्पष्ट किया कि यह डील सिर्फ विमान खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक 'खरीद-और-निर्माण' (Buy-and-make) प्रोग्राम है। इसके तहत अधिकांश राफेल जेट्स की असेंबली भारत में ही होगी। भारतीय रक्षा प्रणालियों और स्वदेशी हथियारों को इन विमानों में बड़े पैमाने पर इंटीग्रेट किया जाएगा। 

उन्होंने ये भी बताया कि नौसेना के लिए अनुबंधित राफेल मरीन (Rafale Marine) विमानों में भी भारतीय हथियारों को शामिल करने पर सहमति बन चुकी है। फिलहाल, कंपनियों द्वारा जमा की गई बोलियों (RFP) का मूल्यांकन किया जा रहा है और इस साल के अंत तक खरीद प्रक्रिया किसी ठोस नतीजे पर पहुंच जाएगी।

अगले साल आसमान नापेगा तेजस LCA Mk2

विदेशी लड़ाकू विमानों के साथ-साथ रक्षा मंत्रालय अपने घरेलू एविएशन प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन को लेकर भी बेहद सख्त है। रक्षा सचिव ने बहुप्रतीक्षित लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA Mk2) की टाइमलाइन पर बात करते हुए कहा कि इसकी पहली उड़ान अगले साल के मध्य तक होने की उम्मीद है। वायुसेना ने शुरुआती तौर पर 120 Mk2 फाइटर जेट्स की जरूरत बताई है। 

जैसे ही इसका प्रोटोटाइप तैयार होगा, वायुसेना इसका कड़ा मूल्यांकन करेगी। इस प्रोजेक्ट को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के नेतृत्व में आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसमें प्राइवेट सेक्टर और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) की उत्पादन लाइन का भी शानदार इस्तेमाल हो रहा है।